देश की अदालतों में मुकदमों के बढ़ते बोझ को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में आंकड़े पेश करते हुए बताया है कि इस वक्त देश की अलग-अलग अदालतों में कितने मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और निचली अदालतों के मामलों में मिला दें, तो पेंडिंग केसेस की संख्या 5 करोड़ तक पहुंच जाती है। सरकार ने हाईकोर्ट की स्थिति भी बताई है।
राज्यसभा सांसद दिलीप कुमार राय द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) के हवाले से यह जानकारी दी। सुप्रीम कोर्ट की बात करें यहां कई मामले 3 दशकों से लंबित हैं। SC में 30 साल से भी अधिक समय से 26 मुकदमे पेंडिंग हैं। वहीं 558 मामले 20 साल से ज्यादा समय से लंबित चले आ रहे हैं।
28 जुलाई 2026 तक देश की शीर्ष अदालत में कुल 95,936 मुकदमे लंबित हैं। वहीं देश के 25 हाईकोर्ट में कुल 63.76 लाख मामले पेंडिंग हैं। जिला और अन्य निचली अदालतों की बात करें तो लंबित मुकदमों का आंकड़ा 4.98 करोड़ के पार पहुंच चुका है। संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों के निपटारे में सालों लग रहे हैं। इस वक्त सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों का पूरा ब्यौरा:
- 30 साल से ज्यादा पुराने: 26 केस
- 20 से 30 साल पुराने: 558 केस
- 10 साल से ज्यादा पुराने: 10,094 केस
- 5 साल से ज्यादा पुराने: 24,611 केस
- 1 साल से ज्यादा पुराने: 49,248 केस
इलाहाबाद HC सबसे आगे
देशभर के 25 हाईकोर्ट में भी मुकदमों का भारी अंबार लगा हुआ है। कुल 63.76 लाख पेंडिंग मामलों में से 80,634 मामले ऐसे हैं जो 30 साल से भी अधिक समय से न्याय के इंतजार में हैं। 4.51 लाख से ज्यादा केस 20 साल से और 16 लाख से अधिक मामले 10 साल से पेंडिंग हैं। अलग-अलग हाईकोर्ट्स की बात करें तो इलाहाबाद हाईकोर्ट इस सूची में सबसे ऊपर है। यहां कुल 12.28 लाख मुकदमे पेंडिंग हैं। इनमें से 53,787 मामले 30 साल से ज्यादा पुराने, 1.61 लाख मामले 20 साल से ज्यादा पुराने और 4.88 लाख मामले एक दशक से भी ज्यादा समय से पेंडिंग हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट दूसरे स्थान पर आता है जहां 30 साल से अधिक पुराने 11,417 मुकदमे लंबित हैं।
इसके अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट में कुल 6.57 लाख पेंडिंग केस हैं, जिनमें 3,901 मामले 30 साल से ज्यादा पुराने हैं। वहीं पटना हाईकोर्ट में 3,513 केस और मद्रास हाईकोर्ट में 3,118 केस 30 साल से अधिक समय से लटके हुए हैं। अगर कुल लंबित मुकदमों की बात करें तो राजस्थान हाईकोर्ट 6.96 लाख मामलों के साथ और मद्रास हाईकोर्ट 5.67 लाख मामलों के साथ शीर्ष राज्यों में शामिल हैं।
निचली अदालतों में भी मुकदमों का पहाड़
देशभर की जिला और निचली अदालतों का हाल भी कुछ अलग नहीं है। यहां कुल 4.98 करोड़ मुकदमे लंबित हैं। आम नागरिकों से जुड़े इन मुकदमों में 81,275 केस ऐसे हैं जो 30 साल से भी अधिक समय से लटके हुए हैं।