मीनाक्षी मंदिर में भी हेराफेरी, कीमती संपत्ति बेच दी; कई अधिकारियों सहित 19 पर केस दर्ज

तमिलनाडु के मदुरै स्थित ऐतिहासिक मीनाक्षी मंदिर की कीमती संपत्ति की अवैध रजिस्ट्री का मामला सामने आया है। सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने इस मामले में पूर्व राजस्व अधिकारियों और सब रजिस्ट्रार सहित 19 लोगों पर केस दर्ज किया है। यह प्राथमिकी मंदिर के संयुक्त आयुक्त एवं कार्यकारी अधिकारी के चेल्लादुरई की शिकायत के आधार पर 25 जुलाई को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120B (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दर्ज की गई है।

एफआईआर के अनुसार, मदुरै के चोक्कीकुलम स्थित यह विवादित संपत्ति पुदुकोट्टई के राजा टीएम दुरैराजा की पत्नी टीएम दुरैरानी द्वारा 1930 में एक वसीयत के जरिए मंदिर को सौंपी गई थी। इस संपत्ति से होने वाली आय का उद्देश्य धार्मिक अनुष्ठानों, दान-पुण्य और छात्रवृत्ति के लिए धन जुटाना था। मंदिर अधिकारियों का आरोप है कि संपत्ति का दर्जा मंदिर बंदोबस्ती का होने के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड से मंदिर का मालिकाना हक अवैध रूप से हटा दिया गया और 2016 में निजी व्यक्तियों के नाम पट्टा ट्रांसफर कर दिया गया।

आरोपियों में कई अधिकारी भी शामिल

पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में कई अधिकारियों और व्यक्तियों को नामजद किया गया है। उनमें पूर्व वीएओ अरसन और पूर्व तहसीलदार अन्बलगन के अलावा सब-रजिस्ट्रार मुरप्पनाडू, सब-रजिस्ट्रार अनंतरमन और वडमदुरै, सब-रजिस्ट्रार प्रशांत संथाना करुप्पन शामिल हैं।

एफआईआर में रामयी आयियर, सेंथमिल सेल्वी, प्रेमा, राजकुमार, मुथुरानी, राजेंद्रन, कुलंथैया, पुष्पराज, जोथी, गीता, एस. इलैयाराजा, पी. अनीश, कविता, प्रकाश और कलिकुमार का भी नाम शामिल है।

कोर्ट आदेश के बाद भी रजिस्ट्री

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जब इस संपत्ति के मालिकाना हक का विवाद राजस्व अधिकारियों के सामने लंबित था और अदालती कार्रवाई चल रही थी तब भी 2021 में मुरप्पनाडू और वडमदुरै सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के माध्यम से पावर-ऑफ-अटॉर्नी और बंधक दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया। मंदिर प्रशासन का दावा है कि ये लेनदेन महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर, वैधानिक प्रावधानों और अदालती आदेशों का उल्लंघन करके किए गए थे।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि शनिवार यानी 25 जुलाई को एफआईआर दर्ज कर ली गई है और सीसीबी ने आगे की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी ने बताया कि फिलहाल इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। आपको बता दें ति शुरुआत में इस मुद्दे को सामाजिक संगठन अरप्पोर अय्यक्कम ने उठाया था, जिसके बाद हिंदू धार्मिक और बंदोबस्ती विभाग ने कार्रवाई शुरू की।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री एस. रमेश ने कहा कि अगर इस तरह की धोखाधड़ी और गबन की शिकायतें मिलती हैं तो दोषियों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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