OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने ChatGPT का इस्तेमाल करके बच्चों की परवरिश से जुड़ा एक आइडिया शेयर किया, लेकिन जहां कुछ यूजर्स ने इसे “बेहतरीन” बताया, वहीं कुछ लोगों का कहना है कि माता-पिता सीधे अपने बच्चों से बात क्यों नहीं कर सकते। दरअसल, ऑल्टमैन ने एक्स पर एक पोस्ट में यह आइडिया शेयर किया, जो इंटरनेट पर काफी वायरल हो रहा है। उन्होंने चैटजीपीटी को इस्तेमाल करने के एक ऐसे शानदार तरीके के बारे में बताया, जिसके बारे में उन्होंने पिछली रात ही सुना था। हालांकि इस आइडिया पर लोगों की राय अलग-अलग है। चलिए डिटेल में जानते हैं क्या है पूरा मामला…
उन्होंने लिखा, माता-पिता अपने फैमिली कैलेंडर को चैटजीपीटी से जोड़ सकते हैं, हर बच्चे की रुचियों को समझा सकते हैं, और एआई से हर सुबह स्कूल जाने के लिए एक पर्सनलाइज्ड व्यक्तिगत पॉडकास्ट तैयार कर सकते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि पॉडकास्ट में परिवार के शेड्यूल के हिसाब से कुछ चीजें शामिल की जा सकती हैं, जैसे कि उसी दिन बाद में होने वाले एक बच्चे के सॉकर गेम के बारे में याद दिलाना, दूसरे बच्चे का आने वाला जन्मदिन, जरूरी खबरें और दूसरी जानकारी।
ऑल्टमैन ने एक्स पर लिखा, “कल रात मैंने चैटजीपीटी के इस्तेमाल का एक बढ़िया तरीका सुना। अपने परिवार के कैलेंडर को इससे कनेक्ट करें और बच्चों की पसंद-नापसंद के बारे में बताएं। हर सुबह स्कूल जाते समय, इससे एक पॉडकास्ट बनवाएं जिसमें उस दिन दोपहर में होने वाले किसी बच्चे के सॉकर गेम, किसी बच्चे के आने वाले जन्मदिन और कुछ खबरों वगैरह के बारे में बात हो।”

हालांकि, इस विचार ने ऑनलाइन एक बहस छेड़ दी, जिसमें यूजर्स इस बात पर विभाजित हो गए कि क्या यह एक इनोवेटिव पेरेंटिंग टूल है या रोजमर्रा की बातचीत के लिए एक जबरन का रिप्लेसमेंट है।
कुछ लोगों ने इस कॉन्सेप्ट की तारीफ करते हुए इसे फैमिली रूटीन को पर्सनलाइज करने का एक स्मार्ट तरीका बताया, वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या AI को माता-पिता की पारंपरिक भूमिका निभानी चाहिए।
कई यूजर्स ने टिप्पणी की कि माता-पिता चैटजीपीटी पर भरोसा करने के बजाय स्वयं ही बातचीत कर सकते हैं।
कई लोगों ने मजाक उड़ाया कि यह प्रस्ताव ऐसा लग रहा है जैसे एआई इंसानों के सामाजिक संपर्क पर कब्जा कर रहा है, जबकि कुछ ने चिंता व्यक्त की कि बच्चों को पहले से ही बहुत अधिक एआई-जेनरेटेड कंटेंट से अवगत कराया जा रहा है और उन्हें अपने डेली रूटीन में इसकी ज्यादा जरूरत नहीं है।
फिर भी, कुछ यूजर्स का कहना था कि पर्सनलाइज्ड पॉडकास्ट का आइडिया वाकई काम का है और उन्हें लगता है कि स्कूल जाते समय अपनी जिंदगी से जुड़ी कहानियां सुनना कई बच्चों को पसंद आएगा।