रणघोष न्यूज़। पटना
बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित उपचुनावों में शामिल पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर बड़ा राजनीतिक उलटफेर होता दिख रहा है। लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शुरुआती राउंड से ही बढ़त बनाए रखी और मतगणना के आधे से अधिक चरण पूरे होने तक जीत की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए।
मतगणना के 19 राउंड पूरे होने तक प्रशांत किशोर भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा से 11 हजार से अधिक वोटों की बढ़त बनाए हुए थे। कुल 31 राउंड की मतगणना होनी है, लेकिन रुझानों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि भाजपा के लिए अपनी परंपरागत सीट बचाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।
बांकीपुर सीट को भाजपा का अभेद्य किला माना जाता रहा है। यहां भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन और उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा का तीन दशक से अधिक समय तक प्रभाव रहा। वर्ष 2010 में भाजपा को यहां करीब 72 प्रतिशत, 2015 में 60 प्रतिशत, 2020 में 59 प्रतिशत और 2025 में लगभग 63 प्रतिशत वोट मिले थे। इस बार के रुझानों ने इस मजबूत राजनीतिक समीकरण को बदलते हुए दिखाया है।
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा को उम्मीदवार चयन को लेकर भी विवाद का सामना करना पड़ा। पहले घोषित प्रत्याशी के हटने के बाद पार्टी ने जल्दबाजी में नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा। सीट बचाने के लिए भाजपा ने संगठन, सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को पूरी ताकत से प्रचार में उतारा, लेकिन इसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दिया।
दूसरी ओर, प्रशांत किशोर ने स्थानीय मुद्दों, सरकार की कार्यशैली और भाजपा के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने लगातार दावा किया कि बांकीपुर का परिणाम केवल एक विधानसभा सीट का फैसला नहीं होगा, बल्कि बिहार की भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय करेगा।
मतगणना के दौरान जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। बढ़त लगातार बढ़ने के बाद समर्थकों ने जीत का जश्न मनाना भी शुरू कर दिया। यदि अंतिम परिणाम भी इन्हीं रुझानों के अनुरूप रहा तो यह प्रशांत किशोर की चुनावी राजनीति में पहली बड़ी जीत होगी और बिहार की राजनीति में जन सुराज पार्टी की मजबूत एंट्री मानी जाएगी।