NEET पेपर लीक आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विदेश में अपनी पढ़ाई के खर्च को लेकर उठ रहे सवालों पर खुलकर जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी उच्च शिक्षा स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के जरिए पूरी हुई है तथा वह इससे जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर पलटवार करते हुए सवाल किया कि क्या उसके नेता भी अपनी डिग्रियां सार्वजनिक करने को तैयार हैं।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो में कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि एक भाजपा कार्यकर्ता ने आरटीआई के माध्यम से उनकी शिक्षा और आर्थिक स्रोतों की जानकारी मांगी है। उन्होंने कहा कि उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं है और वह अपना स्कॉलरशिप लेटर तथा एजुकेशन लोन से जुड़े दस्तावेज दिखाने के लिए तैयार हैं। हालांकि उन्होंने भाजपा नेताओं से भी अपनी शैक्षणिक योग्यता सार्वजनिक करने की मांग की।
दीपके ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि कुछ लोगों को शिक्षा से इतनी परेशानी क्यों है। उन्होंने कहा कि यदि एक साधारण परिवार का छात्र मेहनत के दम पर बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर सकता है तो इसमें किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसे युवाओं की मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण का परिणाम बताया।
इस बीच सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने अभिजीत दीपके के पिता के वित्तीय मामलों की जांच की मांग की है। उनके पिता सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं और आरोप लगाया गया है कि उन्होंने बेटे की विदेश में पढ़ाई के लिए आर्थिक सहयोग दिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने कहा कि जो भी व्यक्ति उनकी शिक्षा के लिए प्राप्त धन की जांच करना चाहता है, वह स्वतंत्र है।
उन्होंने बताया कि उन्हें बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप मिली थी, जबकि शेष राशि के लिए उन्होंने एजुकेशन लोन लिया था। दीपके ने कहा कि यह लोन अभी भी बकाया है और वह उसका भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा व्यक्तिगत नहीं बल्कि पारदर्शिता का है।
अभिजीत दीपके ने बोस्टन यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ कम्युनिकेशन से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की है। जून 2026 में भारत लौटने के बाद उन्होंने NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का नेतृत्व किया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में देशभर से हजारों छात्र शामिल हुए और परीक्षा प्रणाली में सुधार के साथ तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग उठाई गई।
दीपके ने एक बार फिर सरकार से उन NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग दोहराई, जिन्होंने कथित तौर पर आत्महत्या की। उन्होंने कहा कि अब तक किसी भी पीड़ित परिवार को सहायता नहीं मिली है। उनके अनुसार सरकार नियमों का हवाला देकर निर्णय टाल रही है, जबकि संवेदनशील मामलों में तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।
अभिजीत दीपके के इस बयान के बाद उनकी शिक्षा, आंदोलन और सरकार पर लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया पर भी सभी की नजर रहेगी।