लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 24 घंटे में ही एक और जगह धंस गया। बेहटा गांव के पास बने लगभग पांच मीटर लंबे और डेढ़ मीटर गहरे गड्ढे को आनन-फानन में सही करने का काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि एक के बाद एक लगातार एक्सप्रेसवे के कई जगह धंसने से अब इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बता दें कि एक दिन पहले बुधवार को ही एनएचएआई ने इसे गंभीरता से लेते हुए परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को हटाने के साथ ही पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया के खिलाफ आरोप पत्र तैयार करने की कार्रवाई की थी। यही नहीं लखनऊ-कानपुर की निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक को ‘नॉन परफॉर्मर’ घोषित कर आईआईटी खड़गपुर से जांच कराने का भी ऐलान किया था। यही नहीं एक्सप्रेसवे को टोल फ्री भी कर दिया गया है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर धंसने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एनएचएआई की कार्रवाई के दूसरे ही दिन एक्सप्रेसवे पर एक और बड़ा गड्ढा सामने हो गया। लखनऊ से कानपुर जाने वाले मार्ग पर किलोमीटर-63 के पास 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार वाली लेन पर करीब पांच मीटर लंबा और लगभग डेढ़ मीटर गहरा हिस्सा धंस गया है। गड्ढे की सूचना मिलते ही निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक के अधिकारी मौके पर पहुंचे और आनन-फानन में जेसीबी मशीन लगाकर मरम्मत शुरू कराई। सबसे पहले धंसी हुई मिट्टी को हटाया गया, इसके बाद डंपरों से गिट्टी और सीमेंट का मिश्रण मंगाकर गड्ढे में भरा गया। पांच मीटर लंबे क्षतिग्रस्त हिस्से को भरने में करीब तीन डंपर मिश्रण डाला गया है। मरम्मत का कात अभी चल रहा है।
13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस महत्वाकांक्षी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था। उद्घाटन के अगले ही दिन से इस पर ट्रैफिक का दबाव तेजी से बढ़ा और वाहन तेज रफ्तार से दौड़ने लगे, लेकिन महज 20 दिनों के भीतर ही एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की पोल खुलने लगी। गुरुवार से पहले तूरी गांव, जगेथा, कोरारी, बेगमखेड़ा और बेहटा के पास लखनऊ-कानपुर पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अब सभी की निगाहें आईआईटी खड़गपुर की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बार-बार सड़क धंसने के पीछे डिजाइन की खामी, निर्माण में लापरवाही या सामग्री की गुणवत्ता जिम्मेदार है।