NEET : पर्चियां बनाईं, प्रश्न रटकर होटल जाकर लिखे, एक्सपर्ट ने कैसे लीक किया नीट का पेपर, CBI का खुलासा

NEET UG Paper Leak : नीट यूजी पेपर लीक मामले को लेकर चल रही सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के दिल्ली स्थित ऑफिस से परीक्षा के प्रश्न अलग-अलग तरीकों से बाहर निकाले। इनमें एक एक्सपर्ट ने प्रश्नों को कागज की छोटी छोटी पर्चियों पर लिखकर छिपाया, जबकि दो अन्य विशेषज्ञों ने प्रश्न याद कर लिए और बाद में होटल के कमरे में जाकर उन्हें लिख लिया या NCERT की किताबों में संबंधित पैराग्राफ मार्क कर दिए। सीबीआई के मुताबिक यह मुमकिन इसलिए हो पाया क्योंकि एनटीए ऑफिस के फर्स्ट फ्लोर पर स्थित कॉन्फिडेंशियल सेक्शन से बाहर निकलते समय इन एक्सपर्ट्स की तलाशी नहीं ली जाती थी। इसके अलावा वहां CCTV निगरानी के लिए कोई लाइव मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम भी नहीं था।

गौरतलब है कि दिल्ली फास्टट्रैक कोर्ट में 28 जुलाई को सीबीआई की ओर से फाइल की गई चार्जशीट में NTA बायोलॉजी एक्सपर्ट मनीषा मंधारे, NTA केमिस्ट्री एक्सपर्ट पीवी कुलकर्णी और NTA फिजिक्स एक्सपर्ट मनीषा संजय हवलदार के नाम शामिल हैं। CBI के मुताबिक तीनों सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स को NTA कॉन्फिडेंशियल सेक्शन के अंदर रफ ट्रांसलेशन के काम के लिए सादे पेपर दिए गए थे।

CBI जांच में पाया गया कि कुलकर्णी ने इन प्लेट शीट्स का इस्तेमाल छोटी चिट बनाने के लिए किया था। उसने कथित तौर पर केमिस्ट्री के सभी 135 सवाल जवाब के ऑप्शन के साथ शॉर्ट में लिखे थे। जांच में पता चला कि उसने मनीषा वाघमारे की मदद से स्पेशल कोचिंग क्लास लगाईं और स्टूडेंट्स को ऑप्शन और सही जवाब के साथ सवाल लिखवाए। कुलकर्णी ने इस साल 31 मार्च से 2 अप्रैल तक सवालों के तीन सेट (कुल 135) का बैक ट्रांसलेशन किया।

CBI के मुताबिक बॉटनी के लिए इंग्लिश से मराठी ट्रांसलेटर और जूलॉजी के लिए बैक ट्रांसलेटर, मंधारे अपने होटल के कमरे में वापस आती थीं और NCERT की किताबों में जरूरी पैराग्राफ मार्क करती थीं। जांच में पता चला कि वह भी अपने पुणे वाले घर पर स्टूडेंट्स के लिए स्पेशल कोचिंग क्लास चलाती थीं।

तफ्तीश में यह भी पता चला रहा है कि हवलदार जिसे फिजिक्स के लिए बैक ट्रांसलेशन और तीन सेट की प्रूफ-रीडिंग का काम सौंपा गया था, वह सवालों को शॉर्ट में नोट करती थी। सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की कॉन्फिडेंशियल सेक्शन में अंदर या बाहर जाते समय तलाशी नहीं ली जाती थी। जांच एजेंसी को केवल 20-25 दिनों का CCTV फुटेज मिला। इससे नीट प्रश्नों पत्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

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