अमेरिका में 30 से ज्यादा वॉटर सिस्टम पर साइबर अटैक, ईरान कनेक्शन की जांच; पानी की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

मिनेसोटा में 48 घंटे के भीतर नगरपालिकाओं के जल तंत्र को बनाया निशाना, कई जगह स्वचालित सिस्टम प्रभावित; अमेरिकी एजेंसियां हमले के स्रोत की जांच में जुटीं

रणघोष न्यूज़। वॉशिंगटन।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच देश के महत्वपूर्ण जल ढांचे पर साइबर हमलों की एक श्रृंखला ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। मिनेसोटा में 26 और 27 जुलाई को 30 से अधिक सामुदायिक जल प्रणालियों को एक समन्वित साइबर हमले में निशाना बनाए जाने की पुष्टि राज्य की आईटी एजेंसी ने की है। हालांकि, फिलहाल इन हमलों के पीछे किसका हाथ है, इसकी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।

मिनेसोटा आईटी सर्विसेज के अनुसार, हमलावरों ने जल प्रणालियों की ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी यानी उन डिजिटल प्रणालियों को निशाना बनाया, जिनके जरिए जल संयंत्रों के स्वचालित संचालन और निगरानी का काम होता है। हमले के बाद राज्य ने साइबर सुरक्षा प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय कर दिया और प्रभावित नगरपालिकाओं को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई।

मिनेसोटा के ब्राहम शहर में साइबर हमले के कारण जल संयंत्र का संचालन कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। अधिकारियों को मैनुअल तरीके से व्यवस्था संभालनी पड़ी। हालांकि, संयंत्र को दोबारा ऑनलाइन लाने के बाद अधिकारियों ने बताया कि पानी का फिल्ट्रेशन और ट्रीटमेंट सामान्य रूप से हो रहा था। हमले से पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित होने की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई।

अमेरिका के जल तंत्र पर बढ़ता साइबर खतरा

अमेरिका की जल व्यवस्था हजारों स्थानीय और नगरपालिका प्रणालियों पर निर्भर है। इन संयंत्रों में पानी को पंप करने, शुद्ध करने, दबाव नियंत्रित करने और वितरण जैसी कई प्रक्रियाएं डिजिटल तकनीक से संचालित होती हैं। यही वजह है कि इंटरनेट से जुड़े औद्योगिक नियंत्रण उपकरण और प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर यानी PLC साइबर हमलावरों के लिए संभावित निशाना बन गए हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने पहले भी इंटरनेट से जुड़े PLC और अन्य ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी सिस्टम को लेकर चेतावनी जारी की है। अप्रैल 2026 में EPA, FBI, CISA और NSA ने संयुक्त सलाह जारी करते हुए ईरान से जुड़े साइबर समूहों द्वारा अमेरिकी महत्वपूर्ण ढांचे, जिसमें पेयजल और अपशिष्ट जल प्रणालियां भी शामिल हैं, को निशाना बनाए जाने के खतरे की चेतावनी दी थी।

अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक, ऐसे हमलावर इंटरनेट से जुड़े औद्योगिक नियंत्रण उपकरणों में कमजोर सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। पुराने सिस्टम, कमजोर पासवर्ड और पर्याप्त नेटवर्क सुरक्षा का अभाव छोटे नगरपालिका जल संयंत्रों को विशेष रूप से संवेदनशील बना सकता है।

क्या ईरान के हैकर हैं जिम्मेदार?

हमलों के बीच ईरान कनेक्शन की जांच जरूर चल रही है, लेकिन मिनेसोटा के ताजा हमलों के लिए किसी संगठन या देश को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार घोषित नहीं किया गया है। FBI भी जांच में शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान से जुड़े साइबर समूहों की गतिविधियों को लेकर पहले से चेतावनी जारी की है, लेकिन मौजूदा घटनाओं का अंतिम तकनीकी विश्लेषण अभी बाकी है।

रिपोर्टों के अनुसार, जॉर्जिया, न्यू जर्सी और साउथ डकोटा सहित अन्य राज्यों में भी जल प्रणालियों से जुड़ी साइबर घटनाओं की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन सभी घटनाओं को मिनेसोटा में हुए समन्वित हमले से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी।

सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अब तक किसी भी घटना में बड़े पैमाने पर पेयजल दूषित होने या लोगों को असुरक्षित पानी उपलब्ध होने का प्रमाण नहीं मिला है। कुछ स्थानों पर स्वचालित नियंत्रण प्रभावित होने के कारण कर्मचारियों को मैनुअल संचालन करना पड़ा और एहतियाती कदम उठाए गए।

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जल आपूर्ति को अमेरिका की महत्वपूर्ण जीवनरेखा वाली सेवाओं में गिना जाता है। यदि किसी बड़े हमले में जल शोधन, पंपिंग या रासायनिक प्रक्रिया को लंबे समय तक बाधित किया जाए तो इसका असर केवल पानी की आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अस्पतालों, उद्योगों, अग्निशमन व्यवस्था और आम लोगों के दैनिक जीवन पर भी पड़ सकता है।

अमेरिकी सरकार ने जल क्षेत्र की साइबर सुरक्षा मजबूत करने पर जोर बढ़ा दिया है। EPA ने जल प्रणालियों के लिए साइबर सुरक्षा मूल्यांकन, प्रशिक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया से जुड़े कार्यक्रम भी शुरू किए हैं।

फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मिनेसोटा समेत अलग-अलग राज्यों में सामने आई घटनाओं के बीच कोई साझा कड़ी है या नहीं। अगर इन हमलों के पीछे किसी विदेशी साइबर नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो यह अमेरिका के महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे पर साइबर युद्ध के बढ़ते खतरे का एक और गंभीर संकेत माना जाएगा।

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