केरल में शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा आंदोलन, 13 दिन की भूख हड़ताल के बाद सरकार ने मांगे 45 दिन

LPST रैंक होल्डर्स ने नियुक्ति आदेश जारी करने की मांग उठाई, 37 दिन से सचिवालय के बाहर प्रदर्शन; घास खाकर जताया विरोध, सरकार के आश्वासन पर भूख हड़ताल स्थगित

रणघोष न्यूज़। तिरुवनंतपुरम।

देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकारी नौकरियों में नियुक्ति की मांग को लेकर चल रहे आंदोलनों के बीच अब केरल में भी एलपी स्कूल शिक्षकों की भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हो गया है। तिरुवनंतपुरम स्थित राज्य सचिवालय के बाहर ऑल केरल लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर रैंक होल्डर्स एसोसिएशन के बैनर तले अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के बीच एसोसिएशन की सचिव एस. वलरमथी ने 13 दिन तक भूख हड़ताल की। 11 अगस्त को शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन से बातचीत के बाद सरकार ने मांगों की समीक्षा के लिए 45 दिन का समय मांगा, जिसके बाद भूख हड़ताल स्थगित कर दी गई। हालांकि, सचिवालय के बाहर धरना जारी रखने का फैसला किया गया है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने केरल लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और मई 2025 में जारी रैंक सूची में स्थान हासिल किया, लेकिन बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवार अब भी नियुक्ति आदेश का इंतजार कर रहे हैं। आंदोलनकारियों के अनुसार उनका प्रदर्शन 37 दिनों से जारी है, जबकि भूख हड़ताल का सिलसिला 13 दिनों तक चला।

प्रदर्शनकारियों ने अपनी नाराजगी जताने के लिए अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके भी अपनाए। कुछ रैंक होल्डर्स ने सचिवालय के बाहर घास खाकर विरोध जताया। उनका कहना है कि परीक्षा पास करने और रैंक सूची में आने के बावजूद रोजगार नहीं मिलने से अभ्यर्थी आर्थिक और मानसिक दबाव में हैं।

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में मई 2025 की रैंक सूची से अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवारों को तत्काल नियुक्ति आदेश जारी करना शामिल है। इसके साथ ही स्कूलों और क्षेत्रीय शिक्षा विभागों में खाली शिक्षकीय पदों की जानकारी समयबद्ध तरीके से केरल पीएससी को उपलब्ध कराने की मांग की गई है। प्रदर्शनकारी मौजूदा रैंक सूची की अवधि बढ़ाने की मांग भी कर रहे हैं, ताकि सूची में शामिल अधिक उम्मीदवारों को नियुक्ति का अवसर मिल सके।

आंदोलनकारियों की एक प्रमुख मांग छात्र-शिक्षक अनुपात को 1:25 करने की है। उनका तर्क है कि इससे प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के अतिरिक्त पदों की जरूरत पैदा होगी और योग्य रैंक होल्डर्स को नियुक्ति का अवसर मिल सकेगा। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को नियमित कक्षाओं के दायित्व से मुक्त करने और निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की सीधी नियुक्ति व्यवस्था को खत्म कर भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग भी उठाई गई है। सरकार ने इन मांगों की व्यवहार्यता और प्रशासनिक प्रभावों की समीक्षा के लिए 45 दिन का समय मांगा है।

केरल लोक सेवा आयोग की उपलब्ध जानकारी के मुताबिक एलपी स्कूल शिक्षक पद की 31 मई 2025 को अंतिम रूप दी गई रैंक सूची से अलग-अलग जिलों में नियुक्तियों की प्रक्रिया चलती रही है। उदाहरण के तौर पर आयोग के आंकड़ों में कुछ जिलों में जून-जुलाई 2026 तक उम्मीदवारों को सलाह यानी नियुक्ति के लिए अनुशंसित किए जाने का रिकॉर्ड दर्ज है। इससे यह स्पष्ट है कि अलग-अलग जिलों और श्रेणियों में नियुक्ति की स्थिति एक जैसी नहीं है।

आंदोलन के राजनीतिक मायने भी सामने आने लगे हैं। भाजपा युवा मोर्चा और केरल स्टूडेंट्स यूनियन समेत विभिन्न संगठनों ने रैंक होल्डर्स के समर्थन में प्रदर्शन किया। एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

यहां एक राजनीतिक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है कि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन हैं, जबकि वी.डी. सतीशन विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। इसलिए सरकार से जुड़ी मांगों के संदर्भ में वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बताना सही नहीं होगा।

फिलहाल सरकार की ओर से 45 दिन में मांगों की समीक्षा का आश्वासन मिलने के बाद भूख हड़ताल तो रोक दी गई है, लेकिन रैंक होल्डर्स का धरना जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है और उन्हें नियुक्ति को लेकर स्पष्ट एवं लिखित निर्णय चाहिए। अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि 45 दिन की समीक्षा प्रक्रिया को ठोस नियुक्ति नीति में बदला जाए और लंबे समय से इंतजार कर रहे योग्य अभ्यर्थियों को राहत दी जाए।

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