ध्रुव राठी के विवादित वीडियो पर भारत में लगी रोक, दिल्ली हाईकोर्ट में सितंबर में फिर सुनवाई

गूगल ने अदालत को बताया कि जीएसी के आदेश के बाद वीडियो भारत में रोका गया; याचिकाकर्ता ने वैश्विक स्तर पर हटाने और दूसरे चैनलों पर अपलोड वीडियो हटाने की मांग की

रणघोष न्यूज़। नई दिल्ली।

यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक विवादित वीडियो को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे मामले में मंगलवार को गूगल ने अदालत को बताया कि वीडियो को भारत में रोक दिया गया है। गूगल की ओर से पेश वकील ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत को बताया कि केंद्र सरकार की शिकायत अपीलीय समिति यानी जीएसी के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई है। मामले में याचिका अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने दाखिल की थी।

मामला ध्रुव राठी के उस वीडियो से जुड़ा है, जिसमें भगवान राम, भगवान कृष्ण और सीता देवी को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले बयान दिए जाने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि वीडियो को यूट्यूब पर लाखों बार देखा गया और इसमें कथित तौर पर झूठे, भ्रामक तथा भड़काऊ बयान शामिल थे।

दरअसल, याचिकाकर्ता ने पहले यूट्यूब के समक्ष वीडियो हटाने की शिकायत की थी। शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद मामला जीएसी के सामने ले जाया गया। 3 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने जीएसी को याचिका पर 15 दिनों के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद जीएसी ने 15 जुलाई को गूगल को वीडियो हटाने के निर्देश दिए थे।

अब गूगल ने अदालत को बताया है कि उसने वीडियो को भारत में रोक दिया है। हालांकि, याचिकाकर्ता अमिता सचदेवा ने इसे पूरी तरह अनुपालन नहीं माना। उनका कहना है कि वीडियो भारत के बाहर अब भी देखा जा सकता है और भारत में भी वीपीएन के जरिए इसकी पहुंच संभव है। उन्होंने अदालत से वीडियो को वैश्विक स्तर पर हटाने के लिए निर्देश देने की मांग की।

इस पर अदालत के सामने यह मुद्दा भी आया कि क्या दिल्ली हाईकोर्ट वैश्विक स्तर पर वीडियो हटाने का आदेश दे सकता है। गूगल की ओर से कहा गया कि वैश्विक स्तर पर रोक का मुद्दा पहले से ही हाईकोर्ट की डबल बेंच के सामने लंबित है। ऐसे में इस मामले में उस विषय पर अलग से आदेश देने की स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

याचिकाकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि कुछ अन्य यूट्यूब चैनलों और उपयोगकर्ताओं ने ध्रुव राठी के मूल वीडियो को दोबारा अपलोड किया है। उन्होंने इन वीडियो को भी हटाने के लिए गूगल को निर्देश देने की मांग की। गूगल ने इसका विरोध करते हुए कहा कि दूसरे अपलोड के खिलाफ अलग से याचिका या उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने भी अदालत के सामने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यदि किसी सामग्री को लेकर सक्षम प्राधिकरण की ओर से आपत्ति दर्ज कराई जाती है और उस पर आदेश पारित होता है तो उसके अनुपालन को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए, ताकि मामला बार-बार अलग-अलग स्तर पर न चलता रहे।

इस पूरे विवाद की शुरुआत मार्च 2026 में अपलोड किए गए वीडियो को लेकर हुई थी। याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में शिकायत देने के साथ यूट्यूब के निवासी शिकायत अधिकारी के समक्ष भी वीडियो हटाने की मांग की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, यूट्यूब ने शुरुआत में अपनी सामुदायिक दिशानिर्देश नीति का उल्लंघन पहचानने में असमर्थता जताई थी, जिसके बाद जीएसी में अपील की गई।

अब मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी। फिलहाल गूगल के अनुसार वीडियो भारत में उपलब्ध नहीं है, जबकि वैश्विक स्तर पर इसे हटाने का सवाल अभी अदालत के सामने लंबित है। दिल्ली हाईकोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान इस मामले में आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *