पिंगली वेंकैया से लेकर अशोक चक्र की 24 तीलियों तक, जानिए राष्ट्रीय ध्वज के डिजाइन, रंग, आकार और निर्माण से जुड़ी खास बातें
रणघोष न्यूज़। नई दिल्ली।
भारत का राष्ट्रीय ध्वज केवल तीन रंगों से बना कपड़ा नहीं, बल्कि देश की पहचान, संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब देशभर में तिरंगा शान से लहराता है, तब इससे जुड़ी कई ऐसी बातें भी सामने आती हैं जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। 15 अगस्त को देश स्वतंत्रता दिवस मनाता है और लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं तिरंगे से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और रोचक तथ्य।
फैक्ट नंबर 1: किसने डिजाइन किया तिरंगा?
भारत के राष्ट्रीय ध्वज के डिजाइन का श्रेय स्वतंत्रता सेनानी और डिजाइनर पिंगली वेंकैया को दिया जाता है। संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया था। शुरुआती डिजाइन में चरखे का इस्तेमाल किया गया था, जिसे बाद में अशोक चक्र से बदल दिया गया। राष्ट्रीय ध्वज का वर्तमान स्वरूप स्वतंत्र भारत की पहचान बन गया।
फैक्ट नंबर 2: क्या तिरंगा सिर्फ खादी का ही होता है?
यह बात अब पूरी तरह सही नहीं है कि राष्ट्रीय ध्वज केवल खादी से ही बनाया जा सकता है। गृह मंत्रालय के मौजूदा फ्लैग कोड के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काते और हाथ से बुने या मशीन से बने कॉटन, पॉलिएस्टर, ऊन, सिल्क या खादी बंटिंग से बनाया जा सकता है। 2021 में नियमों में संशोधन के बाद मशीन से बने कपड़े और पॉलिएस्टर को भी अनुमति दी गई।
फैक्ट नंबर 3: तिरंगे की तीनों पट्टियों का क्या मतलब है?
राष्ट्रीय ध्वज में तीन समान चौड़ाई वाली क्षैतिज पट्टियां होती हैं। सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे भारत हरा रंग होता है। सफेद पट्टी के बीच गहरे नीले रंग का अशोक चक्र होता है। फ्लैग कोड के अनुसार अशोक चक्र में 24 समान दूरी पर बनी तीलियां होती हैं।
फैक्ट नंबर 4: अशोक चक्र की 24 तीलियां
तिरंगे के बीच बना अशोक चक्र सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के धर्म चक्र से प्रेरित है। यह निरंतर गति और प्रगति का प्रतीक माना जाता है। चक्र का रंग नेवी ब्लू रखा गया है और इसमें 24 तीलियां होती हैं। फ्लैग कोड में इसे सफेद पट्टी के केंद्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला बताया गया है।
फैक्ट नंबर 5: तिरंगे का अनुपात तय है
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज आयताकार होता है और इसकी लंबाई तथा चौड़ाई का अनुपात 3:2 होता है। यानी यदि ध्वज की लंबाई 3 इकाई है तो उसकी चौड़ाई 2 इकाई होगी। इसकी तीनों पट्टियां समान चौड़ाई की होती हैं।
फैक्ट नंबर 6: तिरंगा बनाने वाली संस्था को लेकर बड़ा बदलाव
लंबे समय तक कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ को देश में तिरंगा बनाने वाली एकमात्र अधिकृत संस्था के रूप में बताया जाता रहा है। लेकिन यह जानकारी अब पूरी तरह अद्यतन नहीं है। सरकार ने 2023 में बताया था कि भारतीय मानक ध्वज यानी IS-I के निर्माण के लिए चार खादी संस्थानों के पास BIS लाइसेंस हैं। इनमें कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ, मध्य भारत खादी संघ ग्वालियर, खादी डायर्स एंड प्रिंटर्स मुंबई और धारवाड़ तालुका गरग क्षेत्रीय सेवा संघ शामिल हैं।
इसलिए यह कहना कि आज भी केवल एक ही संस्था पूरे भारत का तिरंगा बनाती है, सही नहीं होगा। हालांकि कर्नाटक स्थित संस्था तिरंगा निर्माण के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
फैक्ट नंबर 7: लाल किले पर फहराया जाने वाला तिरंगा भी खास होता है
15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से फहराया जाने वाला राष्ट्रीय ध्वज भी निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार किया जाता है। सरकार के अनुसार लाल किले पर 15 अगस्त को फहराया जाने वाला रेशमी राष्ट्रीय ध्वज शाहजहांपुर स्थित ऑर्डनेंस क्लोदिंग फैक्ट्री में तैयार किया जाता है और वह फ्लैग कोड के अनुरूप होता है।
फैक्ट नंबर 8: अटारी बॉर्डर का विशाल तिरंगा
अटारी सीमा पर 2017 में 110 मीटर ऊंचे फ्लैग पोस्ट पर एक विशाल तिरंगा फहराया गया था। उस समय इसे देश के सबसे बड़े तिरंगे के रूप में प्रचारित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार उस ध्वज का आकार करीब 110 मीटर लंबा और 24 मीटर चौड़ा तथा वजन लगभग 55 टन बताया गया था। हालांकि बाद के वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में इससे भी ऊंचे फ्लैग पोस्ट लगाए गए हैं, इसलिए इसे आज के समय में भारत का सबसे बड़ा तिरंगा कहना सही नहीं होगा।
तिरंगे से जुड़े ये तथ्य बताते हैं कि राष्ट्रीय ध्वज का हर हिस्सा तय नियमों और विशेष मानकों से जुड़ा हुआ है। इसके रंग, आकार, अशोक चक्र और निर्माण से लेकर इसे फहराने के तरीके तक के लिए नियम बनाए गए हैं। यही वजह है कि तिरंगे का सम्मान केवल भावनात्मक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिक कर्तव्य भी है।