राजस्थान में 309 नगरीय निकायों के चुनाव का बिगुल, दो चरणों में होगा मतदान

14.40 लाख से अधिक मतदाता करेंगे शहरों की सरकार का फैसला, 10,245 वार्डों में 16,465 मतदान केंद्र बनाए गए; 9 और 10 सितंबर को मतदान

राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान ने प्रदेश में 309 नगरीय निकायों के आम चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। आयोग के अनुसार ये चुनाव ‘एक राज्य एक चुनाव’ की अवधारणा के तहत दो चरणों में कराए जाएंगे। पहले चरण में 9 सितंबर और दूसरे चरण में 10 सितंबर को मतदान होगा। चुनाव परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए जाएंगे। आयोग ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित नगरीय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता भी लागू कर दी है।

आयोग के अनुसार सदस्य पदों के लिए पहले चरण की चुनाव प्रक्रिया 27 अगस्त से शुरू होगी। इस दिन लोक सूचना जारी की जाएगी। नामांकन पत्र प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित की गई है। नामांकन पत्रों की जांच 1 सितंबर को होगी, जबकि अभ्यर्थी 3 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापस ले सकेंगे। चुनाव चिह्नों का आवंटन 4 सितंबर को किया जाएगा। पहले चरण का मतदान 9 सितंबर तथा दूसरे चरण का मतदान 10 सितंबर को होगा। मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया है। मतगणना 14 सितंबर को होगी।

अध्यक्षीय पदों के लिए लोक सूचना 15 सितंबर को जारी होगी। नामांकन पत्र 16 सितंबर तक प्रस्तुत किए जा सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 17 सितंबर को होगी और अभ्यर्थिता वापस लेने की अंतिम तिथि 18 सितंबर दोपहर 3 बजे तक रहेगी। इसी दिन चुनाव चिह्नों का आवंटन किया जाएगा। अध्यक्षीय पदों के लिए मतदान 21 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक होगा और मतगणना मतदान समाप्त होते ही कराई जाएगी। उपाध्यक्षीय पदों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया 22 सितंबर को निर्धारित की गई है।

इन चुनावों में 309 नगरीय निकायों के कुल 1,44,03,853 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 73,98,156 पुरुष, 70,05,186 महिला तथा 511 अन्य श्रेणी के मतदाता शामिल हैं। वर्ष 2019 में 196 नगरीय निकायों में 1,13,19,864 मतदाता थे। इस बार मतदाताओं की संख्या में 27.24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। आयोग के आंकड़ों के अनुसार 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के 21,30,043, 26 से 35 वर्ष के 36,40,211, 36 से 50 वर्ष के 41,70,693, 51 से 59 वर्ष के 20,02,199 तथा 60 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के 24,40,707 मतदाता हैं।

नगरीय निकायों के पुनर्गठन और परिसीमन के बाद इस बार वार्डों और मतदान केंद्रों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है। वर्ष 2019 में 196 नगरीय निकायों में 7,500 वार्ड और 10,153 मतदान केंद्र थे। वर्ष 2026 में 309 नगरीय निकायों में वार्डों की संख्या बढ़कर 10,245 और मतदान केंद्रों की संख्या 16,465 हो गई है। आयोग के अनुसार वार्डों की संख्या में 36.6 प्रतिशत और मतदान केंद्रों की संख्या में 62.16 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के माध्यम से कराया जाएगा। अलवर, भरतपुर, धौलपुर, जोधपुर एवं कोटा में भारत निर्वाचन आयोग के स्वामित्व वाली एम-3 तथा शेष 36 जिलों में राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान एवं राज्य निर्वाचन आयोग, मध्यप्रदेश के स्वामित्व वाली मल्टी पोस्ट ईवीएम का उपयोग किया जाएगा। मतदान में एक ही मॉडल की मशीन का इस्तेमाल होगा। मशीनों का आवंटन जिलों को किया जा चुका है और ईवीएम के आवंटन के लिए रेंडमाइजेशन की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।

मतदाताओं की पहचान के लिए आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता पहचान पत्र के अलावा निर्धारित 11 वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेजों में से किसी एक के आधार पर मतदान की अनुमति होगी। आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार जिन मतदाताओं के पास फोटो पहचान पत्र उपलब्ध नहीं है, वे निर्धारित वैकल्पिक दस्तावेजों के माध्यम से अपनी पहचान साबित कर सकेंगे। मतदाताओं की सहायता के लिए मतदान केंद्रों के समीप वोटर असिस्टेंस बूथ भी स्थापित किए जाएंगे।

चुनाव ड्यूटी के लिए करीब 1,15,255 कर्मचारियों को लगाया जाएगा। मतदान और मतगणना दलों के गठन के लिए कर्मचारियों का रेंडमाइजेशन किया जा रहा है। मतदान दलों को दो स्तरीय प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। वहीं कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 98,790 पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। आयोग ने चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में आवश्यकतानुसार पर्यवेक्षकों की नियुक्ति का भी प्रावधान किया है।

चुनाव से संबंधित शिकायतों और सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई के लिए आयोग मुख्यालय और जिला स्तर पर चुनाव नियंत्रण कक्ष स्थापित करेगा। यह नियंत्रण कक्ष 24 घंटे कार्य करेगा। उम्मीदवारों के प्रचार को लेकर भी आयोग ने नियम तय किए हैं। वाहनों और लाउडस्पीकरों के उपयोग, कटआउट, होर्डिंग, पोस्टर एवं बैनर सहित अन्य प्रचार गतिविधियों को नियंत्रित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

नगर निगम पार्षद के लिए अधिकतम चुनाव खर्च सीमा 3.50 लाख रुपये, नगर परिषद पार्षद के लिए 2.50 लाख रुपये और नगरपालिका सदस्य के लिए 1.50 लाख रुपये निर्धारित की गई है। आयोग ने चुनावी खर्च की निगरानी के लिए भी आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

आयोग ने दिव्यांग मतदाताओं के लिए मतदान केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए हैं। मतदान केंद्रों पर दिव्यांग मतदाताओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी और मतदान भवन में प्रवेश तथा मतदान के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित नगरीय निकाय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आचार संहिता के प्रभाव में आने के बाद ऐसी नई योजनाएं, नए विकास कार्य अथवा नए कार्यादेश जारी नहीं किए जा सकेंगे जो आचार संहिता के प्रावधानों के विपरीत हों। पहले से स्वीकृत अथवा चल रहे विकास कार्यों को भी निर्धारित नियमों के अनुसार ही जारी रखा जा सकेगा।

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी विस्तृत कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों की नगर पालिकाओं, नगर परिषदों और नगर निगमों को दो चरणों में विभाजित किया गया है। आयोग की तालिका के अनुसार पहले चरण में 5,550 वार्ड और दूसरे चरण में 4,695 वार्ड शामिल हैं। इस तरह दोनों चरणों में कुल 10,245 वार्डों में चुनाव होगा।

राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों, मतदाताओं और मीडिया से स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने में सहयोग की अपील की है। अब चुनाव कार्यक्रम सामने आने के साथ ही प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने और उम्मीदवारों की तैयारियों के जोर पकड़ने की संभावना है।

रणघोष न्यूज़। जयपुर।

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