महाराष्ट्र में ‘मराठी टेस्ट’ में पहले ही दिन फेल हुए 1200 से अधिक ऑटो ड्राइवर, पूछे गए थे 16 सवाल

महाराष्ट्र के परिवहन विभाग ने राज्यभर में टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया है। 20 अगस्त से शुरू हुए इस विशेष अभियान के पहले ही दिन आरटीओ के उड़नदस्तों ने मुंबई महानगर क्षेत्र सहित पूरे राज्य में व्यापक चेकिंग अभियान चलाया। पहले दिन 8217 चालकों का मूल्यांकन किया गया, जिनमें से सही तरीके से मराठी में जवाब न दे पाने वाले 1268 ड्राइवरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

दादर स्थित स्वामी नारायण मंदिर के पास रोजाना की तरह टैक्सियों में सवारी भरने की जगह गुरुवार को अलग ही नजारा देखने को मिला। आरटीओ अधिकारियों ने टैक्सियों को रोककर चालकों की मौखिक मराठी परीक्षा ली। अधिकारियों ने ड्राइवरों से रोजाना के यात्रियों से जुड़े सवाल पूछे। जैसे कि गंतव्य स्थान (मंजिल), किराया, यात्रा का समय, यूपीआई (UPI) भुगतान और रास्ते के बारे में उनसे पूछा गया। मुंबई महानगर क्षेत्र में कुल 3995 चालकों की जांच की गई, जिसमें से 604 चालकों को नोटिस थमाया गया।

पूछे जा रहे हैं 15 से 16 सवाल

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में आरटीओ अधिकारियों के हवाले से कहा कि यह जांच ड्राइवरों की भाषा में विशेषज्ञता या धाराप्रवाह मराठी मापने के लिए नहीं है, बल्कि केवल यह देखने के लिए है कि वे यात्रियों से संवाद कर सकते हैं या नहीं। एक आरटीओ अधिकारी ने बताया, “मूल्यांकन प्रक्रिया बेहद सरल है। हमारे पास 15-16 सवालों की एक सूची है, जिसके आधार पर हम यह विश्लेषण कर रहे हैं कि चालक कामचलाऊ मराठी जानता है या नहीं। यदि कोई चालक बुनियादी सवालों के जवाब नहीं दे पाता तभी उसे नोटिस दिया जा रहा है। सरकार की मंशा यह सुनिश्चित करना है कि चालक अपने व्यवसाय को सही ढंग से चला सके और यात्रियों की बात समझकर जवाब दे सके।”

105 दिनों की ट्रेनिंग के बाद शुरू हुई कार्रवाई

परिवहन विभाग का यह कदम 105 दिनों की ट्रेनिंग के बाद उठाया गया है। राज्य के 59 आरटीओ और भाषा प्रशिक्षण केंद्रों में कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के 4500 से अधिक शिक्षकों ने ड्राइवरों को बातचीत के लिए बुनियादी मराठी सिखाई थी। मुंबई में लगभग 1.25 लाख ड्राइवरों ने यह प्रशिक्षण पूरा किया। हालांकि, 7750 चालक मूल्यांकन में असफल रहे जिन्हें फिर से परीक्षा देनी होगी, जबकि 14000 से अधिक ड्राइवरों ने ट्रेनिंग पूरी ही नहीं की थी।

नोटिस पाने वाले चालकों ने भी अपना पक्ष रखा है। अरविंद मौर्य नामक टैक्सी चालक ने कहा, “मैंने क्लास ली थी, लेकिन बोलने में आत्मविश्वास महसूस नहीं हो रहा था। अब मैं यूट्यूब के जरिए क्लासेस लेकर मराठी सीखूंगा। एक महीने बाद जब वे दोबारा जांच करेंगे तो मुझे पूरा भरोसा है कि मैं पास हो जाऊंगा।” वहीं, इकबाल अहमद ने कहा, “काम की व्यस्तता के कारण मैं क्लास नहीं ले पाया था। अब जब नोटिस मिल गया है तो भाषा जरूर सीखूंगा।”

कार्रवाई के दौरान दादर में एक टैक्सी चालक और अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। चालक का दावा था कि उसे मराठी आती है, लेकिन उसने इस पूरी कवायद की जरूरत पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों पर भाषा के मुद्दे में राजनीति लाने का आरोप लगाया। बाद में अधिकारियों और वहां मौजूद लोगों ने उसे शांत कराया।

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