Ajit Pawar Death News: CM बनने की अधूरी ख्वाहिश, 6 बार डिप्टी CM रहे अजित पवार का प्लेन क्रैश में निधन
Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान हादसे में निधन। 6 बार उपमुख्यमंत्री रहे, CM बनने की अधूरी इच्छा के साथ दुनिया से विदा।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार को एक विमान हादसे में निधन हो गया। उनके असामयिक निधन की खबर से राज्य ही नहीं, बल्कि देश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है। डिप्टी सीएम बनने का रिकॉर्ड कायम कर चुके अजित पवार मुख्यमंत्री बनने की अधूरी ख्वाहिश लेकर दुनिया से विदा हो गए।
अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में एक मजबूत प्रशासक, रणनीतिकार और निर्णायक नेता के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से यह स्वीकार किया था कि मुख्यमंत्री बनना उनका सपना रहा, लेकिन परिस्थितियां कभी उनके पक्ष में पूरी तरह नहीं आईं।
CM बनने की अधूरी ख्वाहिश
अजित पवार का एक बयान लंबे समय तक राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहा था। उन्होंने कहा था,
“अगर मैं शरद पवार का बेटा होता, तो क्या मुझे मौका नहीं मिलता? जरूर मिलता। सिर्फ इसलिए कि मैं शरद पवार का बेटा नहीं हूं, मुझे मौका नहीं दिया गया।”
इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में परिवारवाद, नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर नई बहस छेड़ दी थी। माना जाता है कि यही वह पीड़ा थी, जो उनके राजनीतिक जीवन के आखिरी दौर तक उनके साथ रही।
6 बार डिप्टी सीएम, एक अनोखा रिकॉर्ड
5 दिसंबर 2024 को अजित पवार ने छठी बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वे पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की सरकारों में डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी निभा चुके थे।
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2010 में पहली बार उपमुख्यमंत्री बने
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2012 में कांग्रेस-एनसीपी सरकार में अहम भूमिका
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2019 में देवेंद्र फडणवीस के साथ कुछ दिनों की सरकार
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महाविकास अघाड़ी सरकार में भी डिप्टी सीएम
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2022 में भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार में शामिल
वे लगातार 8 बार बारामती से विधायक चुने गए और क्षेत्र में उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती थी।
NCP में टूट और नया सियासी अध्याय
अजित पवार ने अपने राजनीतिक करियर में बड़ा फैसला लेते हुए शरद पवार से अलग राह चुनी और एनसीपी के दो गुटों का गठन हुआ। इस कदम को किसी ने सत्ता की राजनीति कहा, तो किसी ने इसे उनका सबसे साहसिक निर्णय बताया।
हालांकि इसके बावजूद मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का सपना अधूरा ही रह गया।
क्या CM न बनने के पीछे थी साजिश?
राजनीतिक हलकों में लंबे समय से यह चर्चा रही कि 2004 में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद एनसीपी ने मुख्यमंत्री पद पर दावा इसलिए नहीं किया ताकि अजित पवार पार्टी में स्पष्ट रूप से नंबर-2 की भूमिका में ही बने रहें। इस पर कभी पार्टी या अजित पवार की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन यह सवाल हमेशा हवा में तैरता रहा।
महाराष्ट्र की राजनीति में खालीपन
अजित पवार का निधन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। एक ऐसे नेता का अंत हुआ, जिसने सत्ता के कई शिखर देखे, लेकिन मुख्यमंत्री बनने का सपना अधूरा रह गया।
उनकी राजनीतिक यात्रा, फैसले और बयान आने वाले समय में भी चर्चा का विषय बने रहेंगे।