Shankaracharya Avimukteshwaranand News: माघ मेला बीच में छोड़ने का फैसला, मौनी अमावस्या विवाद के बाद नाराज़गी

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला बीच में छोड़ने का लिया फैसला, थोड़ी देर में करेंगे बड़ा ऐलान


Magh Mela News: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला बीच में छोड़ने का फैसला किया। मौनी अमावस्या विवाद के बाद कुछ देर में करेंगे कारणों का खुलासा।


माघ मेला 2026 से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला बीच में ही छोड़ने का फैसला कर लिया है। मौनी अमावस्या के दिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से हुए विवाद के बाद से वह नाराज़ चल रहे थे। बताया जा रहा है कि समर्थकों से देर रात हुई बातचीत के बाद उन्होंने यह अहम निर्णय लिया है। शंकराचार्य इस फैसले का आधिकारिक ऐलान कुछ ही देर में करने वाले हैं और साथ ही माघ मेला छोड़ने के पीछे के कारणों को भी सार्वजनिक करेंगे।

मौनी अमावस्या के दिन हुए घटनाक्रम के बाद शंकराचार्य ने स्नान नहीं किया था और इसके बाद से वह अपने शिविर में भी नहीं गए। लगातार 11वें दिन भी वह शिविर के बाहर धरने पर बैठे रहे। इससे पहले यह माना जा रहा था कि वह माघ पूर्णिमा तक माघ मेले में मौजूद रहेंगे, लेकिन अब उनके इस फैसले ने संत समाज और श्रद्धालुओं को चौंका दिया है।

माघ मेला हर वर्ष मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक लगभग डेढ़ महीने तक चलता है। साधु-संत और कल्पवास करने वाले श्रद्धालु आमतौर पर मकर संक्रांति से माघ पूर्णिमा तक यहां प्रवास करते हैं। इस वर्ष माघ पूर्णिमा एक फरवरी को है। मंगलवार तक शंकराचार्य स्वयं कह चुके थे कि वह मेला छोड़कर नहीं जाएंगे और अंत तक डटे रहेंगे, लेकिन अचानक लिए गए इस फैसले से स्थिति बदलती नजर आ रही है।

अपने विरोध के दसवें दिन शंकराचार्य ने कहा था कि यदि वह माघ मेला छोड़कर चले गए तो तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि वह सनातन धर्म के सम्मान, संतों के साथ हुए अन्याय और अत्याचार के खिलाफ माघ मास तक यहीं बैठे रहेंगे। उनका आरोप था कि इतने दिनों में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का उनसे मिलने न आना यह साबित करता है कि पूरी घटना सत्ता के इशारे पर हुई।

इस बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि यहां उनकी हत्या भी हो सकती है और यदि ऐसा हुआ तो भी उन्हें ही दोषी ठहराया जाएगा। उन्होंने बीते महाकुंभ का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि जब वहां इतने लोगों की जान गई तो क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ जिम्मेदारी तय की गई। शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि ऐसे भय से वह गोरक्षा और सनातन धर्म की आवाज उठाना बंद नहीं करेंगे।

अब सभी की निगाहें शंकराचार्य के आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं, जिसमें यह साफ होगा कि उन्होंने माघ मेला छोड़ने का अंतिम फैसला किन कारणों से लिया और आगे उनकी रणनीति क्या होगी।