तेल-गैस और खाद ही नहीं; अब पर्यटन स्थलों पर भी खतरा, ईद पर ईरान के ऐलान से दुनियाभर में दहशत

ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी भीषण जंग के बीच ईरान ने एक बेहद चौंकाने वाला ऐलान किया है। ईरान ने ईद के दिन यानी शुक्रवार (20 मार्च 2026) को चेतावनी दी है कि अब दुनियाभर के पर्यटन स्थल, पार्क और मनोरंजन क्षेत्र उसके दुश्मनों (अमेरिका और इजरायल) के लिए सुरक्षित नहीं रहेंगे। ईरान ने कहा है कि वह अब पारंपरिक युद्धक्षेत्र से बाहर निकलकर अपने दुश्मनों को छुट्टियों और सैर-सपाटे वाली जगहों पर भी निशाना बनाएगा। इसे अमेरिका और इजरायल पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और दुनिया भर में उनके अधिकारियों को ट्रैक करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। ईद-उल-फितर के मौके पर आए इस बयान से न केवल लोग हैरान और परेशान हैं बल्कि वैश्विक पर्यटन उद्योग में दहशत है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गहरी चिंता में डाल दिया है।

ईरान के शीर्ष सैन्य प्रवक्ता अब्दुलफज़ल शेकरची (Abolfazl Shekarchi) ने शुक्रवार को कड़ा बयान जारी करते हुए चेतावनी दी कि “दुनिया भर के पार्क, मनोरंजन स्थल और पर्यटन केंद्र अब सुरक्षित नहीं रहेंगे।” यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में ईद और फारसी नववर्ष नवरोज़ जैसे महत्वपूर्ण अवसर मनाए जा रहे हैं, जो इस बार युद्ध की छाया में फीके पड़ गए हैं।

दरअसल, ईरान ने हाल के दिनों में खाड़ी देशों के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कुवैत की मिना अल-अहमदी रिफाइनरी पर ड्रोन हमले से आग लग गई, जबकि दुबई और सऊदी अरब में भी मिसाइल हमलों की कोशिशें हुईं। कई स्थानों पर वायु रक्षा प्रणालियों ने हमलों को विफल किया, लेकिन डर और अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा ढांचे पर इन हमलों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है, जिससे ईंधन और खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका है। दूसरी तरफ, इस युद्ध की वजह से फर्टिलाइजर उद्योग पर भी बुरा असर पड़ा है। इससे पहले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली इंटरनेट को भी बाधित करने की धमकी दी है। यानी ईरान हर तरह से पूरी दुनिया पर दबाव बना रहा है।

दूसरी तरफ, जहां अमेरिका और इजरायल यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया है, वहीं ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि वह युद्ध के बीच भी मिसाइल निर्माण जारी रखे हुए है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, उनके हथियार भंडार में कोई बड़ी कमी नहीं आई है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया हवाई हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेताओं की मौत हुई है, जिससे नेतृत्व को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता दिखाई दे रहा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के लगभग 20% तेल की आपूर्ति होती है, वहां तनाव बढ़ने से आपूर्ति बाधित हो रही है। इससे न केवल तेल बल्कि उर्वरक, गैस और अन्य कच्चे माल की कमी की आशंका भी बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें युद्ध शुरू होने से पहले लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 110 डॉलर के पार पहुंच चुकी हैं और आशंका जाहिर की जा रही है कि यह 200 डॉलर को पार कर सकती है। इसका सीधा असर एशियाई देशों, खासकर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है।

इज़रायल ने ईरान के अलावा लेबनान और सीरिया में भी हमले तेज कर दिए हैं, जबकि ईरान समर्थित समूह लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष जल्द नहीं थमा, तो यह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। पर्यटन स्थलों पर खतरे की चेतावनी और ऊर्जा आपूर्ति पर हमलों ने इस युद्ध को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है। जहां एक ओर सैन्य टकराव जारी है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर साफ दिखाई दे रहा है। दुनिया अब इस सवाल का जवाब तलाश रही है कि क्या यह संघर्ष यहीं थमेगा या एक बड़े वैश्विक संकट का रूप ले लेगा?