राजनीति में पर्दे के पीछे : बावल में डॉ. रंगा के चुनाव को दिशा दे रहा एक शख्स

एमडी कभी सामने नही आता लेकिन पर्दे के पीछे निर्णायक भूमिका में


रणघोष खास. बावल से

 2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. एमएल रंगा अपनी कमजोर प्रबंधन टीम की वजह से भी चुनाव हार गए थे। इस बार स्थिति एकदम उलट है। डॉ. रंगा के आस पास और टीम के अंदर बाहर उन लोगों को हटा दिया गया है जिन्होंने अपने निजी स्वार्थ और लालच के लिए जनता के साथ ही चिटिंग की। इनकी अपनी कोई सामाजिक छवि नही थी। लोग इनके चेहरे देखकर दूरिया बना लेते थे। अब ये लोग पूरी तरह से गायब है। दिनभर शैडयूल पर पूरी तरह से नजर रखी जाती है। देर रात तक समीक्षा होती है। कमियों को दूर किया जाता है। इसका सारा जिम्मा ऐसा शख्स संभाल रहा है जो कभी मीडिया की सुर्खियों  में नही आता ओर ना ही सार्वजनिक तौर पर राजनीति सक्रियता में बना रहता है। वह पर्दे के पीछे वह तमाम तरह की भूमिका निभा रहा है जो डॉ. रंगा की जीत को सुनिश्चित कर दे। सभी उसे एमडी के नाम से बुलाते हैं। शहर के शक्तिनगर निवासी कृष्ण एमडी लंबे समय से कांग्रेस विशेषतौर से हुडडा परिवार स बेहद करीब से जुड़े हुए हैं। साधारण व्यक्तित्व होते हुए सामने वाले का सटीक मूल्याकंन कर देते  हैं की वह किस इरादे से आया है और  किस तरह की सोच रखता है। इसलिए टिकट मिलने के बाद  डॉ. रंगा के चारों तरफ ऐसी जमात भी जुट गई थी जिसकी समाज में कोई छवि नही थी लेकिन सफेद कुर्ता पायजामा पहनकर फोटो करवाने में सबसे आगे और बाइक पर बोलने की बीमारी थी। जिससे आमजन बेहद चिड़ रखते थे। एमडी ने एक एक करके ऐसे लोगों को डॉ. रंगा के प्रचार से दूर कर काफी हद तक स्थिति को मजबूत पोजीशन में पहुंचा दिया है। डॉ. रंगा का चुनाव भाजपा उम्मीदवार डॉ. कृष्ण कुमार की कमजोर प्रबंधन नीति ओर कार्यकर्ताओं में निराशा की वजह से उठ नही पाया है जिसका सीधा लाभ कांग्रेस प्रत्याशी  को मिल रहा है।