भारत में कम उम्र की महिलाओं में बढ़े ब्रेस्ट कैंसर के मामले, 1990 के बाद 477% तक बढ़ा खतरा
भारत में महिलाओं की सेहत को लेकर एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। हाल ही में प्रकाशित एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार देश में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में पिछले तीन दशकों के दौरान विस्फोटक वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1990 से 2023 के बीच भारत में स्तन कैंसर के मामलों में लगभग 477.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, इसी अवधि में इस बीमारी से होने वाली मौतों की संख्या में भी 352 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल लैंसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित हुआ है और इसमें दुनिया के 204 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर अब दुनिया भर में महिलाओं में पाया जाने वाला सबसे आम कैंसर बन चुका है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते जागरूकता, जांच और उपचार की व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में यह बीमारी और भी गंभीर रूप ले सकती है।
दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा ब्रेस्ट कैंसर
वैश्विक स्तर पर भी स्तन कैंसर तेजी से फैलती हुई बीमारी के रूप में सामने आ रहा है। अध्ययन के मुताबिक वर्ष 2023 में दुनिया भर में करीब 23 लाख महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के नए मामले सामने आए, जबकि 7.6 लाख से अधिक महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण हुई।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि रोकथाम और शुरुआती जांच पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया तो वर्ष 2050 तक दुनिया भर में हर साल लगभग 35 लाख नए मामले सामने आ सकते हैं और मौतों की संख्या बढ़कर 14 लाख तक पहुंच सकती है।
भारत के आंकड़े क्यों बढ़ा रहे हैं चिंता
भारत में भी ब्रेस्ट कैंसर तेजी से बढ़ता हुआ स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में देश में लगभग 2.03 लाख नए स्तन कैंसर के मामले दर्ज किए गए। वहीं इस बीमारी से करीब 1.02 लाख महिलाओं की मौत हुई।
1990 की तुलना में यह बढ़ोतरी बेहद तेज मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे मध्यम आय वाले देशों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुंच, देर से जांच और जागरूकता की कमी के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है।
भारत में इस बीमारी से जुड़ा आर्थिक बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2021 में ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ा कुल आर्थिक भार लगभग 74 हजार करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2030 तक बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
कम उम्र की महिलाओं में भी बढ़ रहा खतरा
इस रिपोर्ट की सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब ब्रेस्ट कैंसर केवल अधिक उम्र की महिलाओं तक सीमित नहीं रहा। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में 55 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में प्रति एक लाख आबादी पर लगभग 161 मामले सामने आए।
लेकिन 20 से 54 वर्ष की उम्र की महिलाओं में भी प्रति लाख लगभग 50 नए मामले दर्ज किए गए, जो वर्ष 1990 की तुलना में करीब 29 प्रतिशत अधिक हैं। इसका मतलब यह है कि अब कम उम्र की महिलाएं भी इस बीमारी की चपेट में तेजी से आ रही हैं।
ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ने के पीछे क्या हैं कारण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्तन कैंसर का कोई एक निश्चित कारण नहीं होता। इसके पीछे कई जैविक और जीवनशैली से जुड़े कारक जिम्मेदार होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं:
-
मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी
-
धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन
-
परिवार में कैंसर का इतिहास
-
पहली गर्भावस्था में अधिक उम्र
-
बच्चे न होना
-
हार्मोनल असंतुलन
-
वायु प्रदूषण
चिकित्सकों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली में आए बदलाव भी इस बीमारी के बढ़ने का बड़ा कारण बन रहे हैं। पहले जहां महिलाएं कम उम्र में शादी और मातृत्व की प्रक्रिया से गुजरती थीं, वहीं अब कई महिलाएं 30 वर्ष के बाद गर्भधारण करती हैं, जिससे हार्मोनल बदलाव के कारण जोखिम बढ़ सकता है।
वायु प्रदूषण भी बढ़ा रहा कैंसर का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण भी इस बीमारी के बढ़ने का एक महत्वपूर्ण कारण बनता जा रहा है। हाल के एक वैश्विक अध्ययन में पाया गया कि जिन क्षेत्रों में PM 2.5 का स्तर अधिक होता है, वहां रहने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा करीब 28 प्रतिशत तक अधिक होता है।
दिल्ली जैसे बड़े शहरों में वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर है, इसलिए वहां इस बीमारी के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।
देर से पता चलना बनता है बड़ी समस्या
भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में मृत्यु दर अधिक होने का एक बड़ा कारण बीमारी का देर से पता चलना है। आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं कैंसर के तीसरे या चौथे चरण में अस्पताल पहुंचती हैं।
इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं। अक्सर महिलाएं शर्म, झिझक या इलाज के खर्च के डर से समय पर डॉक्टर के पास नहीं जातीं। कई बार शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे बीमारी गंभीर अवस्था तक पहुंच जाती है।
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें
डॉक्टरों का कहना है कि यदि ब्रेस्ट कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो इसका इलाज संभव है और मरीज पूरी तरह ठीक भी हो सकती है।
कुछ सामान्य लक्षण जिन पर तुरंत ध्यान देना चाहिए:
-
स्तन में या उसके आसपास गांठ महसूस होना
-
स्तन के आकार या बनावट में बदलाव
-
निप्पल से असामान्य तरल निकलना
-
स्तन में त्वचा का सिकुड़ना या लाल होना
-
लगातार दर्द या असहजता
विशेषज्ञों की सलाह है कि 35 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित रूप से स्क्रीनिंग टेस्ट कराना चाहिए। मैमोग्राफी, एमआरआई और पीईटी स्कैन जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से कैंसर का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सकता है।
सरकार के कार्यक्रम और चुनौतियां
भारत सरकार गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। पहले इसे कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम के नाम से जाना जाता था, जिसे वर्ष 2023 में बदलकर राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम कर दिया गया।
इस कार्यक्रम के तहत मुंह के कैंसर, स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान पर विशेष जोर दिया जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि देश में अभी भी कैंसर के डायग्नोसिस और उपचार की सुविधाओं को और मजबूत करने की जरूरत है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रेस्ट कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार जागरूकता है। यदि महिलाएं नियमित जांच कराएं, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें तो इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
समय पर जांच और इलाज से न केवल लाखों महिलाओं की जान बचाई जा सकती है बल्कि इस बीमारी से जुड़ा आर्थिक बोझ भी कम किया जा सकता है। इसलिए विशेषज्ञ लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि ब्रेस्ट कैंसर को लेकर डरने के बजाय जागरूक होना जरूरी है।