ईरान युद्ध का भारत पर असर: खाड़ी देशों में फंसे लाखों भारतीय, सरकार ने 52 हजार लोगों को सुरक्षित वापस लाया

ईरान युद्ध का भारत पर असर, खाड़ी देशों में फंसे लाखों भारतीय; हजारों की सुरक्षित वापसी

मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब भारत में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव का माहौल है। इस युद्ध का सीधा प्रभाव उन लाखों भारतीयों पर पड़ा है जो खाड़ी देशों में काम, पढ़ाई या पर्यटन के लिए गए हुए हैं।

युद्ध के कारण कई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे बंद कर दिए गए हैं और बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द हो गई हैं। इसके चलते हजारों भारतीय नागरिक अपने-अपने देशों में फंस गए हैं और भारत लौटने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर भारत में बैठे उनके परिवारजन लगातार चिंता में हैं और अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


सरकार ने 52 हजार से ज्यादा भारतीयों की कराई वापसी

भारत सरकार ने इस संकट की स्थिति को देखते हुए तेजी से कदम उठाए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद 1 से 7 मार्च के बीच खाड़ी क्षेत्र से 52 हजार से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया गया है।

इनमें से लगभग 32 हजार लोगों ने भारतीय विमानों के जरिए यात्रा की, जबकि बाकी यात्रियों ने विदेशी एयरलाइंस की मदद से भारत वापसी की। सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त उड़ानों की व्यवस्था भी की जा रही है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर लगातार निगरानी बनाए हुए है और वहां मौजूद भारतीय नागरिकों को नियमित रूप से सलाह और सुरक्षा निर्देश जारी किए जा रहे हैं।


खाड़ी देशों में रहते हैं करीब 90 लाख भारतीय

खाड़ी क्षेत्र में भारतीयों की बड़ी आबादी रहती है। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार फारस की खाड़ी से जुड़े छह प्रमुख देशों में लगभग 90 लाख भारतीय नागरिक निवास करते हैं।

इनमें बड़ी संख्या उन कामगारों की है जो निर्माण, तेल उद्योग, होटल, परिवहन और अन्य क्षेत्रों में रोजगार के लिए वहां जाते हैं। इसके अलावा हजारों छात्र भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए इन देशों में रहते हैं।

उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं। अकेले उत्तर प्रदेश से ही लगभग 25 लाख लोग इन देशों में रोजगार के लिए गए हुए हैं।


युद्ध के कारण बढ़ा डर और अनिश्चितता

युद्ध शुरू होने के बाद खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल है। कई लोग बताते हैं कि भले ही रिहायशी इलाकों में अभी तक बड़े हमले नहीं हुए हैं, लेकिन मिसाइल हमलों की खबरों ने लोगों के मन में भय पैदा कर दिया है।

दुबई में काम करने वाले कुछ भारतीय कामगारों का कहना है कि वे अब काम के बाद सीधे अपने कमरों में चले जाते हैं और बाहर कम ही निकलते हैं। हालांकि कई इलाकों में जीवन सामान्य रूप से चल रहा है, फिर भी युद्ध की खबरें लोगों को लगातार चिंतित कर रही हैं।


भारत में परिवारों की बढ़ी चिंता

भारत में भी इन हालात का गहरा असर देखने को मिल रहा है। जिन परिवारों के सदस्य खाड़ी देशों में रहते हैं, वे लगातार फोन और इंटरनेट के माध्यम से उनसे संपर्क बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

कई परिवारों का कहना है कि कभी-कभी घंटों तक संपर्क नहीं हो पाता, जिससे चिंता और बढ़ जाती है। कुछ मामलों में लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर भी ले जाया गया है।


ईरान में पढ़ने वाले छात्र भी परेशान

ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र धार्मिक और अन्य शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाते हैं। युद्ध की स्थिति बनने के बाद वहां भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।

कई छात्रों के परिवारों ने बताया कि वे सुरक्षित तो हैं, लेकिन लगातार डर और अनिश्चितता के माहौल में रह रहे हैं। कुछ इलाकों में इंटरनेट और संचार सेवाओं में भी बाधा आने की खबरें सामने आई हैं।


इजराइल जाने वाले भारतीय श्रमिकों पर अस्थायी रोक

युद्ध के कारण भारत सरकार ने एहतियात के तौर पर कुछ फैसले भी लिए हैं। उत्तर प्रदेश से इजराइल जाने वाले लगभग 300 भारतीय श्रमिकों की यात्रा पर 21 मार्च तक अस्थायी रोक लगा दी गई है

इन श्रमिकों का चयन निर्माण क्षेत्र में काम करने के लिए किया गया था। लेकिन मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने फिलहाल उनकी यात्रा स्थगित कर दी है।


फ्लाइट रद्द होने से बढ़ी मुश्किलें

सबसे बड़ी समस्या उड़ानों के बंद होने से पैदा हुई है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने इस क्षेत्र के लिए अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं, जबकि कुछ उड़ानों का किराया भी काफी बढ़ गया है।

ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में जहां भारत से खाड़ी देशों के लिए टिकट 17 से 18 हजार रुपये में मिल जाता था, वहीं अब यही टिकट 25 से 30 हजार रुपये तक पहुंच गया है।

इस कारण न केवल लौटने वाले यात्रियों को परेशानी हो रही है, बल्कि ट्रैवल एजेंसियों का कारोबार भी काफी प्रभावित हुआ है।


सरकार की अपील: दूतावास से संपर्क में रहें

भारत सरकार ने खाड़ी देशों में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और अपने नजदीकी भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास से संपर्क बनाए रखें।

सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बचाव अभियान भी चलाया जाएगा। फिलहाल प्राथमिकता उन लोगों को सुरक्षित निकालने की है जो ट्रांजिट में फंस गए हैं या अल्पकालिक यात्रा पर वहां गए थे।