नगर परिषद रेवाड़ी की बदलती ग्राउंड रिपोर्ट : रेवाड़ी में कांग्रेस के लिए लक्ष्मण रेखा पार करना आसान नहीं…

भाजपा के लिए  रामबाण बन गए हैं लक्ष्मण यादव


रणघोष खास. सुभाष चौधरी

 2024 के विधानसभा चुनाव में रेवाड़ी की जिम्मेदारी मिलने के तुरंत बाद शहर की गली मोहल्लों में झाडू चलाने से लेकर विधानसभा पटल पर छोटी से छोटी ओर बड़ी से बड़ी समस्याओं ओर मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर विपक्ष की तमाम तरह की राजनीति को कोमा में पहुंचाने वाले भाजपा विधायक लक्ष्मण सिंह यादव नगर परिषद चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों के लिए रामबाण बने हुए हैं। इसकी प्रमुख वजह उनका जनता से सीधा जुड़ाव रखना। पिछले डेढ़ सालों में लक्ष्मण यादव हर उस गली मोहल्ले, सामाजिक, धार्मिक कार्यक्रमों व दुख, सुख में नजर आए जो एक मुखिया के तौर पर महसूस की जाती है।

शहर में चुनाव प्रचार को लेकर जितने भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं उसे गौर से देखिए। लक्ष्मण यादव की आवाज को सबसे ज्यादा तालिया मिल रही है। यह राजनीति का पहला ऐसा चेहरा है जिसने विधायक बनने के एक महीने बाद ही हाथों में झाडू थाम ली थी। नगर परिषद में भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ जमकर आवाज उठाईं। पार्टी के अंदर बाहर भी लड़ते रहे। आमतौर पर बहुत कम देखने को मिलता है जब कोई जनप्रतिनिधि अपनी ही सरकार में सिस्टम से खुलकर दो दो हाथ करता हुआ नजर आए। नगर परिषद चुनाव में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का आशीर्वाद लेकर विनिता पीपल मैदान में है। शुरूआत में लग रहा था मैदान खाली रहने से भाजपा आसानी से जीत दर्ज कर लेगी लेकिन राव के विरोध में एक ऐसा बड़ा खेमा तेजी से पूरी तरह से सक्रिय हो गया जिसने हार जीत के अंतर को ही खत्म कर दिया है। दरअसल राव के विरोधी भाजपा को नही राव की हैसियत को हराना चाहते हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव में वे ऐसा करने में कामयाब हो चुके हैं। इस बार नगर परिषद चुनाव में राव के लिए अब लक्ष्मण यादव रामबाण की तरह है जिसने विधायक बनने के बाद अपनी कार्यप्रणाली से जनता से पारिवारिक- सामाजिक एवं राजनीति व्यवहार एवं काम कराने के तौर तरीकों से मजबूत रिश्ता बनाया हुआ है। जिसकी मजबूत झलक 15जून 2025 को रेवाड़ी के राव तुलाराम स्टेडियम  में हुई विकास रैली में नजर आई जब झुलसाती गर्मी में पहली बार इस नेता की एक आवाज पर  शहर बहुत बड़ी तादाद में उठकर जलसे में नजर आया था जिसे देखकर खिलखिला उठे मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों से जुड़ी परियोजनाओं की छड़ी लगा दी थी। जिसका अच्छा खासा रिपोर्ट कार्ड लेकर लक्ष्मण यादव जनता से चर्चा करते रहते  है। मुख्यमंत्री से लगातार मुलाकात कर अनेक परियोजनाएं  अब जमीन पर भी नजर आ रही है।  सबसे बड़ी बात विधायक बनने के बाद  लक्ष्मण यादव ने अपने स्वभाव एवं अंदाज को साधारण से विशेष नही होने दिया। इन तमाम खुबियों की वजह से लक्ष्मण यादव की चुनाव में दमदार मौजूदगी ही विरोधियों की हार की प्रमुख वजह बनेगी। लक्ष्मण यादव सार्वजनिक तोर यह स्पष्ट कर चुके हैँ की  भाजपा उनके लिए मां की तरह है। परिवार में  अलग अलग वजहों को लेकर कोई कितना भला बुरा कहे। बिना औकात वाले कितना ही हमला करे।  घर की अंदर बाहर की लड़ाई में मां की गरिमा को ठेस नही पहुंचनी चाहिए। इसी भावना  के साथ लक्ष्मण यादव ने चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है। राव इंद्रजीत भी बखूबी समझते हैं की  इस चुनाव में  लक्ष्मण की मौजूदगी ही विरोधियों के मंसूबों पर पानी फेर रही है। हालांकि रामपुरा हाउस का एक खेमा सुनियोजित साजिश के तहत भाजपा को हराकर लक्ष्मण यादव को शहीद कराने में लगा हुआ है ताकि उनके लिए आगे की जमीन तैयार हो जाए। यह वो लोग है जिनकी जनता में कोई हैसियत नही है लेकिन दरबारी बनकर अपना खेल खेलने में अच्छी खासी महारत रखते हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस के लिए लक्ष्मण रेखा को पार करना इसलिए आसान नही है की जनता और लक्ष्मण के बीच कोई दूरी नही बची है और ना ही  दरवाजों को खटखटाना पड़ता है जबकि प्रमुख कांग्रेसी  किस घर में रहते हैं पहले  मिलने से पहले यह  पता करना होता है।