भाजपा- कांग्रेसी यह भ्रम निकाल दे उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट मिलेंगे
– मतदाता इस बात का पता लगा रहा है की किसके राज में भ्रष्टाचार ने सबसे ज्यादा तांडव मचाया था।
रणघोष खास. सुभाष चौधरी
नगर परिषद रेवाड़ी चुनाव में भ्रष्टाचार को लेकर एक दूसरे पर हमला करती आ रही भाजपा- कांग्रेस की सेना और उसके सेनापति चुनाव प्रचार में सर्वप्रथम अपनी ईमानदारी की एनओसी बांटना बंद कर दे। यह पब्लिक सब जानती है। अगर ईमानदारी को ही यह बताना पड़ रहा है की वह ईमानदार है तो समझ जाइए की वह भी सुंदर दिखने के लिए ब्यूटी पार्लर से तैयार होकर आई है।
इस चुनाव की सबसे बड़ी खुबसूरती यह है की भाजपा- कांग्रेस के पास यह बताने के लिए कुछ भी नही है की उन्होंने अपने समय में शहर में बेहतर बदलाव के लिए वे कदम उठाए थे जिसकी आहट आज तक महसूस की जा रही है। सारा का सारा चुनाव टिकटों को लेकर दोनों दलों में अंदरखाने चल रही गुटबाजी और बिखराव से बनने वाले समीकरणों पर आकर ठहर गया है। जिसके चलते मतदाता यह समझ नही पा रहा है की आखिर वह करे तो क्या करें। ऐसे हालातों में उसके पास इस्तेमाल होने के अलावा कोई चारा नही बचा है। इन दोनों के अलावा मैदान में ऐसा कोई दमदार चेहरा नही है जो रेवाड़ी के लिए संघर्ष की तपिश से तपकर मैदान में उतरा हो। बाकि उम्मीदवार चुनाव में माहौल देखकर पैदा हो गए और चुनाव के बाद वही लौट जाएंगे जहां से आए थे।
भाजपा की जीत की प्रमुख वजह और उसकी हार को समझिए
भाजपा को इस आधार पर किसी सूरत में जीत नही मिलेगी की उसके पास शहर की तस्वीर बदलने का विजन है। पिछले आठ सालों से नप में भाजपा का ही राज रहा है। अगर बदलाव होता तो भाजपाईयों की फौज को गली मोहल्लों में घूमने के लिए संघर्ष नही करना पड़ता। उलटा भ्रष्टाचार का ऐसा जाल फैला दिया की कांग्रेस के समय में हुए घोटाले भी कई मामलों में डिप्रेशन में चले गए। कांग्रेस ने भी लंबे समय तक नप पर राज किया है। जमकर भ्रष्टाचार की गंगा बही है। किसी से कुछ छिपा नही है। इसलिए कांग्रेसियों का भ्रष्टाचार पर बोलना शराब के ठेके पर दूध पीने जैसा है। इसके अलावा पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव के परिवार का अधिकांश समय गुरुग्राम में रहने की वजह से कार्यकर्ताओं से जो पहले सीधा जुड़ाव बना हुआ था वह काफी कमजोर व बिखर गया है। इस कारण भी भाजपा को इसका लाभ मिलेगा। साथ ही कप्तान का समय समय पर अपनी जुबान से निकली आवाज का यू टर्न कर देना भी कांग्रेस के इस धाकड़ नेता की पकड़ को कमजोर साबित कर रहा है। जहां तक कांग्रेस प्रत्याशी का सवाल है जिसकी पहचान अपने पति है जो बोलने में मास्टर है। बात को बेहद सलीके से कहने की क्षमता रखते हैं। नेता वाले सारे गुण है। अपने दिमाग का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। हमला भी सलीके से कर रहे हैं। अगर उन्हें एक साल पहले यह अहसास हो जाता की यह सीट आरक्षित होगी और उनकी पत्नी को उम्मीदवार बनाया जाएगा तो यह शख्स अपनी कुछ कमजोरियों को चुनाव तक छुटटी पर भेजकर भाजपा के लिए आफत बन जाता। उसकी यह कमजोरियां उजागर होकर अब चुनाव में उसी के लिए मुसीबत बनी हुई है। जिसका काफी हद तक फायदा भाजपा को मिलेगा। इन छोटी छोटी वजहों से कांग्रेस हार सकती है। लेकिन भाजपाई यह भ्रम निकाल दे की जनता उसे विकास के नाम पर दुबारा मौका दे रही है।
भाजपा में गुटबाजी का तांडव कांग्रेस के लिए रामबाण
भाजपा कितना ही अनुशासन को लेकर बड़ी बड़ी गाइड लाइन जारी कर दें। कुछ एक को पार्टी से निकाल दें। इसके बावजूद गुटबाजी का तांडव सबसे ज्यादा उसी में नजर आ रहा है जिसका सीधा लाभ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर कांग्रेस को मिलेगा। चुनाव में भाजपा दो चरित्र में नजर आ रही है जिसमें एक चेहरा केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह वाला है दूसरा उनकी विरोधी वाली भाजपा का जो पूरी हैसियत रखता है। राव विरोधियों को यह बखूबी पता है की अगर भाजपा जीत दर्ज करती है तो इसका संपूर्ण श्रेय राव को जाएगा जो आगे चलकर यही ताकत कांग्रेस से ज्यादा उन्हीं पर ही हमला करेगी। अगर कांग्रेस जीत दर्ज करती है तो इससे एक तीर से कई निशाने होंगे। पहला राव का वर्चस्व खतरे में पड़ जाएगा। दूसरा साढ़े तीन साल तक बचे भाजपा सरकार के शासन में कांग्रेसी चेयरपर्सन को ईमानदारी से काम करना होगा नही तो भाजपा एक चूक पर निपटाने में एक पल भी नही गंवाती है। चूंकि रेवाड़ी से भाजपा विधायक है इसलिए कांग्रेसी चाहकर भी विकास का श्रेय नही ले पाएंगे। हालांकि कप्तान परिवार के लिए कांग्रेस की जीत आक्सीजन की तरह रहेगी जो लंबे समय तक उनकी राजनीति को कमजोर नही होने देगी। उनकी मौजूदा स्थिति पार्टी के अंदर बाहर इतनी मजबूत नही है की कप्तान उम्र के हिसाब से लंबे समय तक उसका बखूबी सामना कर पाए। पूर्व विधायक चिरंजीव राव प्रयास कर रहे हैं लेकिन अधिकांश समय गुरुग्राम व रेवाड़ी की दूरी ले जाती है। कुल मिलाकर कांग्रेस की जीत आसान नही है अगर विजयी भी होती है तो यह उसका भाग्य होगा जिस तरह 2019 के विधानसभा चुनाव में चिरंजीव राव का उदय हुआ था।