10 इंच का पिज्जा ऑर्डर किया, डिलीवर हुआ 3 इंच छोटा; कंज्यूमर फोरम ने ठोका 10500 का जुर्माना

कंज्यूमर फोरम ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म और एक रेस्टोरेंट 10 हजार से अधिक का जुर्माना ठोका है। यह जुर्माना तीन इंच छोटा पिज्जा की डिलीवरी के लिए दोषी पाए जाने पर लगाया गया है। आपको बता दें कि एक ग्राहक ने मोबाइल ऐप के जरिए पिज्जा का ऑर्डर किया था, जिसकी लंबाई 10 इंच दिखाई गई थी। लेकिन ग्राहक को इसके बजाय 7 इंच का पिज्जा डिलीवर हुआ। आयोग ने दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से ग्राहक को 10,520 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

आपको बता दें कि यह मामला उत्तराखंड का है। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य डॉ. अमरीश रावत और रंजना गोयल की पीठ ने स्पष्ट किया कि ऑर्डर किए गए आकार से 3 इंच छोटा पिज्जा देना सेवा में गंभीर लापरवाही और ग्राहकों के साथ धोखा है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि दोनों पक्ष आदेश जारी होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को कुल 10,520 रुपये का भुगतान करेंगे।

आपको बता दें कि पिज्जा की कीमत और डिलीवरी शुल्क 520 रुपये रुपये है। कंज्यूमर फोरम ने मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के मुआवजे: के तौर पर 5,000 रुपये तय किए। कानूनी खर्च के लिए 5,000 रुपये देने होंगे।

3 इंच छोटा पिज्जा और रिफंड से इनकार

मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप के जरिए 505 रुपये के दो पिज्जा ऑर्डर किए थे। ऐप पर पिज्जा का साइज 10 इंच दर्ज था, लेकिन जब ऑर्डर मिला तो मापने पर पिज्जा का आकार केवल 7 इंच निकला। शिकायतकर्ता ने तुरंत ऐप के कस्टमर सपोर्ट चैट के माध्यम से इस समस्या को उठाया। समस्या को स्वीकार करने के बावजूद, कंपनी ने ग्राहक को रिफंड देने से मना कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH), CPGRAMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और औपचारिक कानूनी नोटिस भी भेजा। जब कहीं से राहत नहीं मिली तो उन्होंने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने तर्क दिया कि वह केवल एक मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है जो ग्राहकों को रेस्टोरेंट से जोड़ता है। कंपनी का काम केवल ऑर्डर को पहुंचाना है, वह भोजन तैयार करने या उसकी पैकेजिंग के लिए जिम्मेदार नहीं है। वहीं, दूसरा पक्ष यानी कि रेस्टोरेंट अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके बाद उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई।

उपभोक्ता आयोग ने प्लेटफॉर्म की दलील को खारिज करते हुए कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को महज मध्यस्थ नहीं माना जा सकता। वह एक अभिन्न हिस्सा है, जिसमें ऑर्डर स्वीकार करना, रेस्टोरेंट के साथ तालमेल बिठाना और डिलीवरी पूरी करना शामिल है। यदि ऐप पर दिखाई गई जानकारी के अनुसार सामान नहीं दिया जाता है तो इसके लिए डिलीवरी प्लेटफॉर्म और विक्रेता दोनों जिम्मेदार हैं।

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