डॉक्टर बनने के लिए सालों मेहनत की, विधायक बनने के लिए महज 20 दिन..
रणघोष खास. बावल से सुभाष चौधरी की ग्रांउड रिपोर्ट
हरियाणा विधानसभा चुनाव में मंगलवार को भाजपा ने अपनी दूसरी जारी सूची में बावल से दो बार विधायक रहकर 10 साल कैबिनेट मंत्री डॉ. बनवारीलाल की टिकट काटकर उन्हीं के पेशे से डॉ. कृष्ण कुमार को टिकट दे दी। सोमवार तक डॉ. कृष्ण कुमार स्वास्थ्य विभाग में निदेशक पद पर सेवाए दे रहे थे। एक दिन बाद अब भाजपा नेता बन गए। उन्होंने डाक्टर बनने के लिए बचपन से युवा अवस्था तक कई सालों कड़ी मेहनत की। विधायक बनने के लिए उन्हें महज 20 दिन का समय मिला है। अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में मतदान ओर परिणाम आ जाएंगे। इतने कम समय में डॉ. कृष्ण कुमार मतदाताओं का कैसे चैकअप कर पाएंगे। यह देखने वाली बात होगी। उन्हें केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के कोटे से लाया गया है। इसलिए राह थोड़ी आसान हो सकती है लेकिन हालात बिल्कुल भी सामान्य नही है। राव के लिए सबसे बड़ी चुनौती अटेली से अपनी बेटी आरती राव की जीत को सुनिश्चित करना है जाहिर है उनके लिए यह सीट पहली प्राथमिकता रहेगी। उसके बाद वे अपने समर्थक उम्मीदवारों के लिए समय निकाल पाएंगे। बावल में डॉ. बनवारीलाल की राजी खुशी टिकट नही काटी गई है इसलिए अंदरखाने भाजपा में बिखराव पूरी तरह से रहेगा। इतना ही नही टिकट नही मिलने पर अन्य दावेदार भी अलग ही भूमिका में रहेगे। 2024 के चुनाव में हवा एकदम बदली हुई है। भाजपा या कांग्रेस के नाम से ज्यादा उम्मीदवार की हैसियत इस बार विशेष अहमियत रखेगी। इस मामले में डॉ. कृष्ण कुमार राजनीति के एकदम नए खिलाड़ी है। वे अपने क्षेत्र में चर्चित नाम भी नही रहे। इसलिए उनके लिए बावल की सीट जीतना किसी सूरत में आसान नही है। जहां तक राव इंद्रजीत सिंह के प्रभाव का सवाल है। अपने समर्थकों के लिए टिकट लाने में वे जरूर कामयाब हो गए लेकिन उनका प्रभाव पहले की तरह बरकरार है। वो बात अब नही है। इस बार लोकसभा चुनाव में राव इंद्रजीत सिंह की बावल से कम हुई बढ़त यह साबित कर रही है की इस बार भाजपा के लिए इस सीट का निकलना किसी चमत्कार से कम नही है।