दिल्ली के 3 कोचिंग सेंटरों के मालिक सहित 9 गिरफ्तार, AAP सरकार के दौरान हड़प लिए थे 37 करोड़ रुपए

दिल्ली पुलिस ने तीन कोचिंग संस्थानों के मालिकों और निदेशकों सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर छात्रों के जाली दस्तावेज बनाकर सरकार से 37 करोड़ रुपए लेने का आरोप है। मामला पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान’जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ से जुड़ा है।

अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने तीन कोचिंग संस्थानों के मालिकों और निदेशकों सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने 2018 से 2021 के बीच ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ के तहत सरकार से 37 करोड़ रुपए लेने के लिए छात्रों के जाली दस्तावेज तैयार किए थे।

2018-19 में शुरू की गई योजना

एसीबी ने बताया कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा 2018-19 में शुरू की गई योजना के तहत कागजों पर 22000 से ज्यादा छात्र और 43 कोचिंग सेंटर रजिस्टर्ड थे, लेकिन इसमें कई बड़ी गड़बड़ियां पाई गईं। एसीबी के मुताबिक एसीपी जरनैल सिंह के नेतृत्व वाली एक टीम को पिछले साल अगस्त में बंद हो चुकी इस योजना के ऑडिट के बाद दिल्ली सरकार के एससी/एसटी कल्याण विभाग से एक शिकायत मिली थी।

विभाग द्वारा फीस और वजीफा दिया जाना था

एसीबी के प्रमुख विक्रमजीत सिंह ने एचटी को बताया कि जांच में पता चला है कि यह योजना 2017 में शुरू की गई थी। यह योजना SC/ST/OBC और अन्य EWS श्रेणी के छात्रों के लिए थी। विभाग द्वारा संस्थानों को कोचिंग फीस और छात्रों के लिए वजीफा दिया जाना था। जांच में यह भी सामने आया कि इन संस्थानों ने इस योजना के तहत 37.20 करोड़ रुपए की रकम प्राप्त की थी। सभी संस्थानों के लिए इस योजना का लाभ लेने के लिए एक अलग बैंक खाता रखना जरूरी था, जिसका पालन नहीं किया गया।

डुप्लीकेट रिकॉर्ड मौजूद थे

जांच के दौरान जब छात्रों का डेटा इकट्ठा किया गया तो पता चला कि उसमें डुप्लीकेट रिकॉर्ड मौजूद थे। सिंह ने कहा कि जांच से पता चला कि छात्रों की जो सूचियां संस्थानों ने फंड लेने के लिए जमा की थीं, उनमें कई छात्रों के नाम दो या उससे ज्यादा संस्थानों में शामिल थे।

फंड लेने के लिए जाली दस्तावेज बनाए

सिंह ने आगे कहा कि हमने पाया कि इस योजना के तहत छात्रों के दाखिले से जुड़े जाली दस्तावेज संस्थानों द्वारा फंड का दावा करने के लिए तैयार किए गए और पेश किए गए। इसके अलावा एससी/एसटी कल्याण विभाग ने भी फंड के गलत हाथों में जाने की न तो जांच की और न ही उसे नियंत्रित किया। हमने यह भी पाया कि कई मामलों में संस्थानों को मिली वजीफे की रकम छात्रों को बांटी ही नहीं गई। कई संस्थानों ने तो छात्रों को स्थानीय ट्यूशन के लिए भी भेज दिया।

मालिकों और निदेशकों ने जवाब नहीं दिया

अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने मालिकों और निदेशकों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा कि हमारे द्वारा केस दर्ज किए जाने के बाद तो कुछ लोगों ने पैसे ट्रांसफर करने की कोशिश भी की।

इसके बाद 29 अप्रैल को ACB ने इस मामले के सिलसिले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया और उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुखर्जी नगर के एक लोकप्रिय संस्थान के मालिकों, सिविल सेवा और आईआईटी-जेईई संस्थानों के निदेशकों और दिल्ली के कर्मचारियों के रूप में हुई है।

ये आरोपी गिरफ्तार किए गए

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक रविंद्र सिंह हैं। वह रविंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन सिविल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं। एचटी ने कोचिंग के एक स्टाफ से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि ये आरोप झूठे हैं। हमने ऐसा कुछ भी नहीं किया है। सर को गलत तरीके से उठाया गया है। हमें तो उनकी गिरफ्तारी के बारे में ठीक से पता भी नहीं है।

एक और आरोपी हर्षित हैं। वह मूमेंटम नीट आईआईटी एकेडमी में सीनियर फैकल्टी है। उनके कोचिंग सेंटर के एक कर्मचारी ने बताया कि उन्हें गिरफ्तारी के बारे में कोई जानकारी नहीं है और उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

इस मामले में दो अन्य आरोपियों किरण इंस्टीट्यूट ऑफ करियर अचीवमेंट के मालिक शंभू शरण और वहां के एक कर्मचारी संजय कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। एचटी ने शरण के छोटे भाई से बात की। उसने कहा कि मुझे अपने भाई की गिरफ्तारी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैं पुणे में रहता हूं। मुझे नहीं पता था कि उस पर इन सब चीजों का आरोप लगा है। वह सालों से क्लासें चला रहा है।

आप के प्रवक्ता ने क्या कहा

वहीं, आम आदमी पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा कि न तो एसीबी की शिकायत में और न ही उनके नोटिस में आप के किसी नेता या आप सरकार का नाम था। पार्टी ने इन गिरफ्तारियों पर यह कहते हुए कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि गिरफ्तार किए गए लोग निजी व्यक्ति थे।