अमेरिका और ईरान में जंग के बीच समंदर में बारूदी सुरंगों की खूब चर्चा हो रही है। अमेरिका ने दावा किया है कि वह अपनी नौकाओं से बारूदी सुरंगों को साफ करवा रहा है। अमेरिका ने यह भी कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में अगर कोई भी ईरानी नौका बारूदी सुरंग बिछाते हुए दिखी तो उसे तुरंत तबाह कर दिया जाए। दरअसल इस तरह की सुरंगें मिनटों में बड़े से बड़े जहाज को तबाह करने की क्षमता रखती हैं। वहीं होर्मुज के रास्ते दुनिया के 20 फीसदी पेट्रोलियम का व्यापार होता है जो कि अपने आपमें ही ज्वलनशील है। ऐसे में इन सुरंगों से भारी खतरा बना ही रहता है।
कुछ ऐसे विस्फोटक डिवाइस होते हैं जो कि पानी में भी फट सकते हैं। इसका इस्तेमाल पहली बार 14वीं शताब्दी में किया गया था। चीन समुद्री लुटेरों को तबाह करने के लिए इस तरह की सुरंगों का इस्तेमाल करता था। पहले विश्वयुद्ध के दौरान भी इस तरह की सुरंगों का इस्तेमाल किया गया था। इन सुरंगों के जरिए टारगेटेड हमला किया जाता है।
समंदर में बिछाई जाने वाली बारूदी सुरंगें कई तरह की होती हं। कुछ कॉन्टैक्ट सुरंगें होती हैं जोकि किसी भी जहाज के टकराते ही फट जाती हैं इसके अलावा कुछ ऐसी सुरंगें हैं जिनको प्रोग्राम किया जाता है और विस्फोट नियंत्रम में होता है। इसके अलावा चुंबकीय तरंगों, दबाव या फिर किसी तरह की हलचल को रीड करके फटने वाली सुरंगें भी होती हैं।
कुछ सुरंगें पानी में डाल दी जाती हैं और वे तैरती रहती हैं इसके अलावा कॉन्टैक्ट मान एंकर से बंधी रहती हैं। एनफ्लुंस सुरंगें समंदर के तल पर हीरहती हैं। वहीं कुछ छोटे विस्फोटकों की भी सुरंगें तैयार की जाती हैं जिन्हें जहाजों के आगे चिपका दिया जाता है। अमेरिका का दावा है कि ईरान ने होर्मुज में छह हजार बारूदी सुरंगें बिछाी हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि बारूदी सुरंगों की संख्या के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
बारूदी सुरंगों को समंदर में तलाश करना बेहद कठिन होता है। जरूरी नहीं हैं कि ये सरंगें समंदर में ऊपर ही हों। इसके अलावा समुद्री धाराओं के साथ इनकी स्थिति बदलती रहती है। इन्हें साफ करने के बाद भी अगर विस्फोटक के अवशेष बचे रह जाते हैं तो इनमें फिर से विस्फोट हो सकता है। आम तौर पर माइन्स खोजने के लिए सोनार का इस्तेमाल किया जाता है।