राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पीएम नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी आरएसएस के सबसे अच्छे प्रतिनिधि हैं। आरएसएस में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले दत्तात्रेय होसबाले का यह बयान अहम माना जा रहा है और भाजपा के साथ संघ के रिश्तों के बारे में भी संकेत दे रहा है। माना जा रहा है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय है। पीटीआई से इंटरव्यू में होसबाले ने कहा कि अगले 25 सालों के लिए आरएसएस ने पंच परिवर्तन पर फोकस किया है। हम चाहते हैं कि समाज में सौहार्द रहे, पर्यावरण के लिए काम हो। इसके अलावा लोग औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त हों। नागरिकों में कर्तव्य का बोध आए। इसके अलावा परिवारों को बचाना भी प्राथमिकता है।
उन्होंने पीएम मोदी के बारे में बात करते हुए कहा कि वह अपने ही ढंग से काम करता हूं। उनका यूनिक स्टाइल है। उन्होंने कहा कि वह आरएसएस के अच्छे प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि उनकी भाषा या शब्द अलग हो सकते हैं, लेकिन संदेश अलग नहीं होता। उदाहरण के तौर पर आरएसएस ने एक पेड़ लगाने की अपील की तो पीएम मोदी ने उसे ‘एक पेड़ मां के नाम’ कैंपेन के तौर पर चला दिया। यही नहीं उन्होंने कहा कि विकास के भी ऐसे कई काम हैं, जिनमें आरएसएस की विचारधारा दिखती है। होसबाले ने कहा कि कई सरकारी योजनाओं में आरएसएस की विचारधारा दिखती है।
होसबाले ने कहा कि आरएसएस यदि पंच परिवर्तन की बात कर रहा है तो पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के तहत पंच प्रण की बात लाल किले की प्राचीर से की। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी भी एक स्वयंसेवक हैं और वह नैसर्गिक रूप से वैचारिक काम करते हैं। उन्होंने कहा कि जब आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर डाक टिकट और सिक्का रिलीज किया जा रहा था, तब पीएम मोदी ने भविष्य के भारत की बात की थी। उनका कहना था कि संघ ने जो रास्ता दिखाया है, वही भारत का मार्ग है।
संघ नेता ने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं। लेकिन वह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से अलग नहीं हैं। वह संगठन के बारे में जानते हैं। वह बहुत अच्छे से जानते हैं कि संघ का विचार किया है। वह आरएसएस के सच्चे और अच्छे प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का जब 1980 में गठन हुआ था तो उसके संस्थापक चाहते थे कि आरएसएस से उनका संबंध बना रहे। उन्होंने कहा कि वे लोग चाहते थे कि आरएसएस से संबंध रहें। इसीलिए वे जनता पार्टी से निकले और फिर अलग पार्टी भाजपा के रूप में बनाई। इसलिए आरएसएस और भाजपा के संबंधों को डिस्टर्ब नहीं किया जा सकता।