भाजपाई जीतने पर कुंवारों की शादी कराएंगे, कांग्रेसी जीतते ही पप्पू को चांद पर भेज देंगे
कांग्रेस का घोषणा पत्र पप्पू चांद पर जाएगा की तरह है। कैसे जाएगा, पहले क्यों नही जा पाया, क्या वजह रही होगी, क्या इससे पहले कोई चांद पर पहुंचा है, कितनी चुनौतियां आएगी। इसका कोई जिक्र नही है बस कांग्रेस को वोट दे दीजिए पप्पू अगले दिन चांद पर पहुंच जाएगा।
रणघोष खास. सुभाष चौधरी
नगर परिषद रेवाड़ी चुनाव को लेकर भाजपा, कांग्रेस व अन्य प्रत्याशियों के साथ साथ पार्टी के नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस बात को दिमाग से निकाल दे की 10 मई के मतदान से आने वाले नतीजे आपकी सोच से होकर गुजरे हैं। इस बार का चुनाव ना तो विकास को लेकर है और नाही वह जाति, धर्म व विशेष समुदाय की धारणा बनाकर बैठा है। यह एससी महिला आरक्षित सीट है जाहिर है इस सीट पर वही बैठेगा जो इस श्रेणी में आता है। चुनाव में ना भ्रष्टाचार का मुददा अपना प्रभाव डाल रहा है ना ही घोषणा पत्र में किए जा रहे व तमाम दावे जिसकी असलियत वोट बटोरने के लिए अपनाए जा रहे तमाम हथकंडों की स्याही से लिखी गई है। कोई भी प्रत्याशी यह दावा करे की वह समाजसेवा करने के लिए राजनीति के इस मैदान में उतरा है समझ जाइए आपका सामना जंगल की उस लोमड़ी से हो रहा है जो फल, कचरा, कीड़े से लेकर जानवर तक खा सकती है। एकांत में अकेले रहती है और मौका मिलते ही अपने शातिर दिमाग से जंगल के राजा शेर के महा भोज का हिस्सा भी बन जाती है। सोचिए जिसमें सेवा का भाव होता है वह चुनाव में जन्म नही लेता।
इस चुनाव में प्रचार के नाम पर जनता की भावनाओं से भी जमकर खेला गया। एक भाजपा विधायिका महोदय ने चुनाव जीताने पर कुंवारे लड़कों की शादी कराने का टेंडर ले लिया। यह जनता की तकलीफों के घावों पर नमक छिड़कना नही तो क्या है। इसी तरह कांग्रेस का घोषणा पत्र गौर से देखिए ऐसा लगेगा की रेवाडी का जनम ही चुनाव में हुआ है और इस धरा की नए सिरे से रचना ही कांग्रेसी करने जा रहे हैं। जिस तरह की घोषनाओं को लिखा गया है ऐसा लगता है की मास्टरजी के मुर्गा बनाने के डर से विद्यार्थी ने फटाफट यह तो लिख दिया की पप्पू चांद पर जाएगा। कैसे जाएगा, पहले क्यों नही किया, किस वजह से नही जा पाया, क्या इससे पहले कोई चांद पर पहुंचा है, कितनी चुनौतियां आएगी। इससे कोई मतलब नही है बस कांग्रेस को वोट दे दीजिए पप्पू चांद पर पहुंच जाएगा। घोषणा पत्र जारी करते समय कांग्रेसी भूल गए की 35 साल से अधिक समय तक जनता ने उन्हें भरपूर मौका दिया था। उस समय का ऐसा कोई विशेष कार्य किया होता तो उसे आज इस घोषणा पत्र में जगह मिल जाती। 2014 से पहले तक और 2019 से 2024 तक रेवाड़ी ने कांग्रेस को ही अपना माना हुआ था। इतना ही नही चुनाव लड़ने वाले दोनो प्रमुख प्रत्याशी कम से कम अपने वार्ड को ही अपने कार्यकाल में आदर्श बना देते तो वोट के लिए उन्हें यह स्किप्ट नही लिखनी पड़ती। सीधी सपाट बात यह है की जनता दोनो राजनीतिक दलों के राज में जमकर छली गई है। जमकर भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी का खेल हुआ हैं। बड़े और असरदार नेता सबकुछ जानते हुए भी धृतराष्ट्र बनकर अनदेखी करते रहे। जनता का द्रोपदी की तरह इस बार भी चीरहरण होगा। यह स्पष्ट नजर आ रहा है। फर्क इतना है की यह पहचानाना मुश्किल हो जाएगा की इसमें असली दुर्याधन, दुशासन कौन है। जहां तक मीडिया की बात है उसे संजय की तरह होना चाहिए लेकिन वह तो शकुनि के चरित्र में नजर आ रहा है जहां पासे की जगह पैकेज का टुकड़ा मिलने पर वह रजल्ट से पहले ही पल पल में हर किसी की हार जीत तय कर रहा है। कुल मिलाकर जो भी जीतेगा वह ईमानदारी से इस बात को स्वीकार कर ले की उसका दोष अपने प्रतिद्धंदी से थोड़ा कम था। उसके साथ ऐसे लोगों का संग था जिनका प्रारब्ध उनकी जीत का आधार बन गया। राम- सीता वनवास में इसलिए निश्चिंत रहे की लक्ष्मण परछाई की तरह उनके साथ थे। इसके अलावा किसी की कोई कहानी नही है।