NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के समय दर्ज केस और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को बिहार और असम सरकार ने राहत दे दी है। दोनों ही राज्यों ने मामले वापस लेने और रिहा करने की तैयारी कर ली है। हालांकि, अब तक इसे लेकर पश्चिम बंगाल की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। इसी बीच खबर है कि राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी नीट टॉपर्स को सम्मानित करने का प्लान बनाया है।
NEET पेपर लीक प्रदर्शन को लेकर देशभर में जारी राजनीतिक और सामाजिक हलचल के बीच बिहार और असम सरकार ने प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। दोनों राज्यों ने आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने और गिरफ्तार लोगों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल सरकार ने अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसी बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मंगलवार को NEET UG परीक्षा में सफल रहे 100 मेधावी छात्रों को सम्मानित करने जा रहे हैं, जिससे राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
NEET पेपर लीक प्रदर्शन: बिहार और असम सरकार ने दिया बड़ा संदेश
बिहार और असम सरकारों ने संकेत दिए हैं कि आंदोलन के दौरान दर्ज कई मामलों को वापस लिया जाएगा। बिहार सरकार ने स्पष्ट किया है कि 26 जुलाई शाम 6 बजे तक विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ सरकार की ओर से कोई प्रतिकूल या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
बिहार पुलिस के अनुसार, 25 जुलाई को आयोजित बिहार बंद के दौरान कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें 339 नाबालिगों को तुरंत छोड़ दिया गया, जबकि 355 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई थी। अब इन मामलों की समीक्षा की जा रही है।
असम सरकार ने भी घोषणा की है कि परीक्षा लीक आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होगी। राज्य में इस आंदोलन से जुड़े पांच मामले दर्ज किए गए थे और 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
NEET पेपर लीक प्रदर्शन के बीच पश्चिम बंगाल में टॉपर्स सम्मान समारोह
पश्चिम बंगाल सरकार ने अभी तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने को लेकर कोई घोषणा नहीं की है। हालांकि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मंगलवार को नाबन्न सभागार में NEET UG परीक्षा में सफल 100 शुरुआती छात्रों को सम्मानित करेंगे।
यह कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित किया जा रहा है जब हाल ही में कोलकाता में NEET पेपर लीक प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं। ऐसे में इस समारोह को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
कोलकाता में प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ था?
राजधानी कोलकाता के एस्प्लेनेड और धर्मतला क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई थी। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े।
प्रदर्शनकारियों ने डोरिना चौराहे पर जाम लगाया और पुलिस पर पानी की बोतलें तथा अन्य सामान फेंका। रानी रासमणि मार्ग पर बड़ी संख्या में लोग धरने पर बैठे रहे, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ।
पुलिस के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े कुछ समर्थक भी बाद में वामपंथी संगठनों के प्रदर्शन में शामिल हो गए थे।
CJP ने सरकार को दी दोबारा आंदोलन की चेतावनी
CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार के साथ हुई तीसरे दौर की वार्ता में यह सहमति बनी थी कि देशभर में आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस ली जाएंगी और भविष्य में भी किसी प्रदर्शनकारी के खिलाफ नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि संगठन अब सरकार की ओर से लिखित समझौते का इंतजार कर रहा है। यदि समझौते का पालन नहीं हुआ तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है।
कोलकाता गिरफ्तारी को लेकर भी उठे सवाल
CJP की कानूनी टीम से जुड़ी रत्ना सिंह ने दावा किया कि कोलकाता में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तार लोगों पर कड़े कानूनी प्रावधान लगाए जाने की आशंका है। संगठन का कहना है कि सभी गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
भाजपा शासित राज्यों पर CJP की नजर
CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया कि बिहार और असम के बाद राजस्थान में भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने कहा कि संगठन अन्य भाजपा और एनडीए शासित राज्यों में भी इसी तरह के आदेश जारी कराने का प्रयास कर रहा है ताकि किसी भी युवा को आंदोलन में भाग लेने के कारण कानूनी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था हुई सख्त
CJP द्वारा दोबारा आंदोलन की चेतावनी दिए जाने के बाद राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर, नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने की पूरी तैयारी है।
आगे क्या हो सकता है?
बिहार और असम सरकारों के फैसले के बाद अब निगाहें पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों पर टिकी हैं। यदि अन्य राज्य भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेते हैं, तो यह आंदोलन से जुड़े युवाओं के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, यदि सहमति के अनुरूप कार्रवाई नहीं होती है तो CJP ने दोबारा देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी है।