राजस्थान निकाय चुनाव 2026: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण का मतदान 9 सितंबर 2026 को पूरा हो गया। पहले चरण में प्रदेश के 162 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों में मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इनमें 4 नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगरपालिकाएं शामिल रहीं। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक कराया गया। अब प्रत्याशियों की किस्मत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में बंद है और 14 सितंबर को मतगणना के साथ तस्वीर साफ होगी।
162 निकायों में 20 हजार से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में
पहले चरण का चुनाव राजस्थान की शहरी राजनीति के लिहाज से काफी अहम रहा। इस चरण में पार्षद के 5,393 पदों के लिए 20,623 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। मतदान के लिए कुल 7,683 मतदान केंद्र बनाए गए थे। करीब 57.52 लाख मतदाता इस चरण में अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए पात्र थे।
पहले चरण में अलवर, भरतपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा नगर निगमों के अलावा बड़ी संख्या में नगर परिषद और नगरपालिकाओं में मतदान हुआ। जयपुर जिले के 18 नगरीय निकाय भी इसी चरण में शामिल रहे।
मतदान में दिखा उत्साह, कई जगह विवाद भी
पहले चरण में कई इलाकों में मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही कतारें नजर आईं। आदिवासी क्षेत्र अरनोद में मतदान प्रतिशत 91.98 प्रतिशत तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई, जबकि जयपुर जिले के 18 निकायों में औसत मतदान 86.80 प्रतिशत बताया गया।
हालांकि, चुनाव का पहला चरण पूरी तरह विवादों से मुक्त नहीं रहा। कई जगह प्रत्याशियों और समर्थकों के बीच विवाद, झड़प, कथित फर्जी मतदान के आरोप और मतदान केंद्रों पर तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें सामने आईं। फतेहपुर में एक विवाद के दौरान पथराव की घटना में दो लोगों के घायल होने की खबर आई। डीडवाना में निर्दलीय विधायक यूनुस खान ने मतदान केंद्र पर अपने साथ कथित मारपीट का आरोप लगाया।
झुंझुनूं में एक मतदान अधिकारी पर मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप के बाद उसे मतदान केंद्र से हटा दिया गया। नाथद्वारा में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी को पुलिस ने एक पुराने मामले के संबंध में हिरासत में लिया। जोधपुर जिले के बालेसर दुर्गावतान में भी मतदान केंद्रों के आसपास दो पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी।
ईवीएम में बंद हुई प्रत्याशियों की किस्मत
पहले चरण का मतदान खत्म होते ही अब राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों का पूरा ध्यान मतगणना पर टिक गया है। 14 सितंबर को मतगणना होगी और इसी दिन यह तय होगा कि किस वार्ड में जनता ने किस प्रत्याशी पर भरोसा जताया।
निकाय चुनाव विधानसभा या लोकसभा चुनाव से अलग होते हैं। यहां स्थानीय मुद्दे, प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि, वार्ड में सक्रियता, जातीय और सामाजिक समीकरण तथा स्थानीय स्तर पर पार्टी संगठन की पकड़ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि कई वार्डों में पार्टी के बजाय प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ मुकाबले को प्रभावित कर सकती है।
भाजपा-कांग्रेस के साथ निर्दलीयों ने भी बनाई चुनौती
पहले चरण के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी राजनीतिक टक्कर के साथ कई जगह निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बनाया। टिकट वितरण से नाराज होकर मैदान में उतरे बागी प्रत्याशी भी कई निकायों में राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बने।
स्थानीय निकाय चुनाव में यह देखना खास होगा कि पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों के सामने उतरे निर्दलीय उम्मीदवार कितने प्रभावी रहे। कई वार्डों में बागी प्रत्याशी जीत का समीकरण बदलने की स्थिति में बताए जा रहे हैं।
मतदान प्रतिशत ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
पहले चरण में मतदान प्रतिशत को लेकर शुरुआती और बाद की रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। मतदान समाप्ति के बाद कुछ रिपोर्टों में करीब 65 प्रतिशत मतदान बताया गया, जबकि बाद में सामने आई रिपोर्ट में राज्य का औसत मतदान करीब 76 प्रतिशत बताया गया। इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़े को ही निर्णायक माना जाना चाहिए।
ऊंचे मतदान प्रतिशत ने प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अब हर उम्मीदवार अपने-अपने वार्ड में मतदान के रुझान को अपने पक्ष में मानकर चल रहा है। समर्थकों के बीच जीत के दावे शुरू हो चुके हैं, लेकिन वास्तविक तस्वीर ईवीएम खुलने के बाद ही सामने आएगी।
अब दूसरे चरण की बारी
पहले चरण के बाद अब राजस्थान में दूसरे चरण के मतदान पर नजर है। दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर को होना है। इसके बाद दोनों चरणों की मतगणना 14 सितंबर को होगी।
इस चुनाव का असर केवल वार्डों तक सीमित नहीं रहेगा। नगर निकायों में बनने वाले बोर्ड आने वाले वर्षों में शहरों की सड़क, सफाई, जल निकासी, रोशनी, अतिक्रमण, आवारा पशु, कचरा प्रबंधन और अन्य स्थानीय सुविधाओं से जुड़े फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यही कारण है कि राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के पहले चरण का परिणाम स्थानीय राजनीति के साथ-साथ आने वाले समय में भाजपा, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक ताकतों के जमीनी संगठन की स्थिति का भी संकेत दे सकता है। फिलहाल 14 सितंबर का इंतजार है, जब ईवीएम खुलेंगी और जनता के फैसले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।