कच्चे तेल की आग में झुलसा शेयर बाजार, मस्क को 30.4 अरब डॉलर का झटका; अडानी की दौलत 3.58 अरब डॉलर बढ़ी

रणघोष न्यूज़। नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर दिखाई देने लगा है। अमेरिकी शेयर बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट रही, वहीं इस बिकवाली का असर दुनिया के बड़े अरबपतियों की संपत्ति पर भी पड़ा। बुधवार को एलन मस्क से लेकर मुकेश अंबानी तक कई अरबपतियों की संपत्ति में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, शेयरों में तेजी के चलते गौतम अडानी की संपत्ति में इसके उलट बड़ा इजाफा हुआ।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक मुकेश अंबानी की संपत्ति में बुधवार को 1.26 अरब डॉलर की कमी आई और उनका कुल नेटवर्थ घटकर 84.8 अरब डॉलर रह गया। वहीं गौतम अडानी की संपत्ति 3.58 अरब डॉलर बढ़कर 112 अरब डॉलर हो गई। अडानी की संपत्ति में बढ़ोतरी के पीछे उनके समूह की कंपनियों के शेयरों में तेजी प्रमुख वजह रही। अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर पांच प्रतिशत से अधिक चढ़कर 3,104.20 रुपये पर बंद हुआ, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।

अमेरिकी शेयर बाजार में भी कच्चे तेल की तेजी का असर साफ दिखाई दिया। बुधवार, 9 सितंबर को डॉऊ जोंस लगातार तीसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ और करीब 400 अंक टूट गया। इस तरह तीन कारोबारी दिनों में डॉऊ जोंस की गिरावट लगभग 1,300 अंक हो गई। एसएंडपी 500 में 0.6 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इस गिरावट का सबसे बड़ा असर दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल एलन मस्क की संपत्ति पर पड़ा। उनकी नेटवर्थ में एक ही दिन में 30.4 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई और यह घटकर करीब 908 अरब डॉलर रह गई। इसके अलावा लैरी पेज की संपत्ति 5.88 अरब डॉलर, सर्गेई ब्रिन की 5.43 अरब डॉलर और जेफ बेजोस की संपत्ति 4.22 अरब डॉलर घट गई। माइकल डेल, लैरी एलिसन, जेनसन हुआंग और स्टीव बाल्मर की संपत्ति में भी गिरावट दर्ज की गई, हालांकि इनमें से किसी की कमी दो अरब डॉलर से अधिक नहीं रही।

शेयर बाजार में इस उथल-पुथल की बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच बुधवार को ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। महंगे तेल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि लंबे समय तक कच्चा तेल महंगा रहने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।

भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और भी महत्वपूर्ण है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर आयात बिल बढ़ने, रुपये पर दबाव आने और महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इसका असर परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर भी पड़ सकता है।

अमेरिकी बाजार में लगातार तीसरे दिन की गिरावट, ब्रेंट क्रूड के 101 डॉलर के पार जाने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर भारतीय शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है। निवेशकों की नजर अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी।

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