समालखा में RSS की तीन दिवसीय अहम बैठक, शताब्दी वर्ष पर होगा बड़ा मंथन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ की महत्वपूर्ण बैठक अगले महीने हरियाणा के समालखा में आयोजित होने जा रही है। संघ के शताब्दी वर्ष (1925-2025) और आगामी राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए यह तीन दिवसीय समागम बेहद अहम माना जा रहा है।
इस बैठक की खास बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इसमें पहली बार शिरकत करेंगे। जनवरी 2026 में भाजपा की कमान संभालने के बाद यह उनका पहला आधिकारिक संघ दौरा होगा।
नितिन नवीन की पहली आधिकारिक संघ मौजूदगी
राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा तेज है कि समालखा बैठक से पहले भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि प्रतिनिधि मंडल में कई नए चेहरे शामिल हो सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव आगामी चुनावों की रणनीति और संगठन को नई ऊर्जा देने की तैयारी का हिस्सा हो सकता है। ऐसे में नितिन नवीन की मौजूदगी इस बैठक को और भी महत्वपूर्ण बना रही है।
शताब्दी वर्ष की समीक्षा बनेगी मुख्य एजेंडा
सूत्रों के मुताबिक, बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों की समीक्षा रहेगा। देशभर में चलाए गए गृह-संपर्क अभियानों, सामाजिक कार्यक्रमों और शताब्दी निमित्त आयोजनों से मिले अनुभवों को साझा किया जाएगा।
संघ नेतृत्व यह आकलन करेगा कि शताब्दी वर्ष के लक्ष्यों को किस हद तक प्राप्त किया गया है और जनसामान्य के बीच संगठन की पहुंच कितनी बढ़ी है।
2025-26 की कार्ययोजना पर चर्चा
प्रतिनिधि सभा की इस बैठक में वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए कार्यों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही आगामी वर्ष के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों, संगठन विस्तार और नई कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी।
बैठक के दौरान सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक विषयों पर महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित होने की संभावना जताई जा रही है।
मंथन में शामिल होंगे शीर्ष पदाधिकारी
इस विचार-मंथन में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित संघ के सभी शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।
इसके अलावा भाजपा सहित संघ से प्रेरित 32 विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी भी बैठक में भाग लेंगे। यह मंच संघ परिवार के व्यापक संगठनात्मक ढांचे के लिए दिशा तय करने वाला माना जाता है।
क्यों अहम है समालखा बैठक?
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शताब्दी वर्ष के समापन चरण की समीक्षा
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भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की पहली संघ उपस्थिति
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संभावित संगठनात्मक फेरबदल के संकेत
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आगामी राजनीतिक और सामाजिक रणनीति पर मंथन
इन सभी कारणों से समालखा में होने वाली यह बैठक राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले समय में इस बैठक के निर्णयों का असर संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर दिखाई दे सकता है।