ईरान से तनाव के बीच सऊदी अरब पहुंचे शहबाज शरीफ, कर्ज और राजनीति के बीच फंसा पाकिस्तान

ईरान से तनाव के बीच सऊदी अरब पहुंचे शहबाज शरीफ, कर्ज और राजनीति के बीच फंसा पाकिस्तान

मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अचानक सऊदी अरब पहुंच गए हैं। माना जा रहा है कि यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और सऊदी अरब भी इस संघर्ष में अमेरिकी पक्ष के करीब माना जा रहा है।

ऐसे हालात में पाकिस्तान का रुख साफ तौर पर सऊदी अरब के समर्थन में दिखाई दे रहा है, जिसने कई राजनीतिक और रणनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।


कर्ज और ऊर्जा सुरक्षा बना बड़ा कारण

विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का झुकाव सऊदी अरब की ओर होने के पीछे सबसे बड़ा कारण आर्थिक मजबूरी है।

पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है और सऊदी अरब से उसे कई बार भारी कर्ज और वित्तीय मदद मिल चुकी है। इसके अलावा ऊर्जा संकट के दौर में सऊदी अरब से मिलने वाली तेल आपूर्ति भी पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

इसी वजह से माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब का साथ देना ज्यादा सुरक्षित समझा है।


शिया-सुन्नी राजनीति भी अहम

पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में शिया और सुन्नी संतुलन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

ईरान एक शिया बहुल देश है, जबकि सऊदी अरब सुन्नी दुनिया का प्रमुख केंद्र माना जाता है। पाकिस्तान की सत्ता और धार्मिक राजनीति में सुन्नी प्रभाव ज्यादा होने के कारण भी इस्लामाबाद सऊदी अरब के करीब नजर आता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान नहीं चाहता कि वह ईरान के साथ बहुत ज्यादा नजदीक दिखाई दे, क्योंकि इससे उसकी आंतरिक राजनीति पर भी असर पड़ सकता है।


सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता

पिछले वर्ष पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता भी हुआ था। इस समझौते के अनुसार यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और दोनों मिलकर उसका सामना करेंगे।

पाकिस्तान ने कई बार यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह अपनी सैन्य ताकत और परमाणु क्षमता के जरिए सऊदी अरब की सुरक्षा में भूमिका निभा सकता है।


बलूचिस्तान बना पाकिस्तान की चिंता

हालांकि पाकिस्तान के लिए यह स्थिति आसान नहीं है। एक तरफ उसे सऊदी अरब से आर्थिक मदद मिलती है, वहीं दूसरी तरफ उसका पड़ोसी देश ईरान है।

पाकिस्तान का बलूचिस्तान क्षेत्र ईरान की सीमा से जुड़ा हुआ है और यह एक सांस्कृतिक रूप से साझा इलाका माना जाता है। ऐसे में यदि पाकिस्तान सऊदी अरब के बहुत करीब जाता है तो ईरान बलूचिस्तान के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान पर दबाव बना सकता है।


प्रवक्ता ने भी किया समर्थन का ऐलान

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने एक दिन पहले ही बयान दिया था कि सऊदी अरब को जहां भी जरूरत होगी, पाकिस्तान उसके साथ खड़ा मिलेगा।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक शहबाज शरीफ सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर रियाद पहुंचे हैं। यह दौरा सिर्फ एक दिन का बताया जा रहा है, लेकिन माना जा रहा है कि क्षेत्रीय हालात को देखते हुए इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।


मध्य-पूर्व की राजनीति में नई हलचल

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पूरे मध्य-पूर्व की राजनीति पर पड़ेगा। ऐसे में पाकिस्तान जैसे देशों को अपने आर्थिक हित, धार्मिक राजनीति और क्षेत्रीय संतुलन के बीच सावधानी से कदम उठाने होंगे।

इस दौरे को भी उसी रणनीतिक संतुलन की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।