सोनम वांगचुक की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल, बिगड़ती सेहत को लेकर केंद्र से मांगा जवाब
सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अहम सवाल पूछे हैं। अदालत ने उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए यह जानना चाहा कि क्या सरकार उनकी लगातार हिरासत पर फिर से विचार कर सकती है।
जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली दो जजों की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। यह याचिका वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने दायर की है, जिसमें उनकी हिरासत को चुनौती दी गई है।
“सेहत अच्छी नहीं… क्या सरकार फिर सोच सकती है?”—कोर्ट
सुनवाई के दौरान जस्टिस पी.बी. वराले ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज से पूछा कि मेडिकल रिपोर्ट में वांगचुक की हालत ठीक नहीं बताई गई है और उम्र से जुड़े कारक भी हैं—ऐसे में क्या सरकार हिरासत पर पुनर्विचार कर सकती है।
इससे पहले पेट दर्द की शिकायत के बाद कोर्ट ने उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराने की अनुमति दी थी और मेडिकल रिपोर्ट अदालत में जमा की जा चुकी है।
केंद्र ने कहा—निर्देश लेकर देंगे जानकारी
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि वे इस संबंध में सरकार से निर्देश लेकर कोर्ट को अवगत कराएंगे।
हिंसक प्रदर्शनों के बाद लिया गया था हिरासत में
सरकार की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि वांगचुक के कथित उकसाने वाले भाषणों के कारण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिनमें चार लोगों की मौत हुई थी।
बताया गया कि किसी व्यक्ति का सीधे हिंसा में शामिल होना जरूरी नहीं है, बल्कि भीड़ को प्रभावित करने की क्षमता भी कार्रवाई के लिए पर्याप्त मानी जा सकती है।
पांच महीने से हिरासत में वांगचुक
अदालत ने यह भी नोट किया कि हिरासत आदेश काफी समय से लागू है और उनकी सेहत चिंता का विषय बनी हुई है।
अब इस मामले में सबकी नजर केंद्र सरकार के रुख पर टिकी है कि वह सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद हिरासत जारी रखने के फैसले पर पुनर्विचार करती है या नहीं।