नांगल चौधरी जिसने विकास के दम से चंडीगढ़ को अपने पास बुला लिया
रणघोष खास. नांगल चौधरी से सुभाष चौधरी की ग्रांउड रिपोर्ट
इस बार के हरियाणा विधानसभा चुनाव में नांगल चौधरी उस चुनिंदा सीटों में शामिल हो चुकी है जहां उम्मीदवार को लेकर भाजपा हाईकमान को सोचने या मंथन करने की जरूरत नही पड़ रही है। सबकुछ आइने की तरह साफ नजर आ रहा है। तीसरी बार भी डॉ. अभय यादव चुनाव लड़ने जा रहे हैं। एक समय था जब यहा आना कोई जल्दी सी पंसद नही करता था। नांगल चौधरी हरियाणा की डार्क जोन वाली विधानसभा कहलाती थी। जमीन के नीचे का पानी सिस्टम की अनदेखी से तेजी से खत्म हो रहा था वहीं जमीन पर विकास के नाम पर जर्जर सड़कें, बेहतर शिक्षा- स्वास्थ्य का अकाल इस विधानसभा की छाती पर बैठकर ठहाके लगा रहा था। 2014 के विधानसभा चुनाव में डाक्टर अभय यादव राजनीति गलियारों से अचानक भाजपा का टिकट लेकर नांगल चौधरी के मैदान में उतर गए। समय इतना कम था कि समझ में नही आ रहा की यह अधिकारी कैसे चुनाव जीतेगा। भाजपा भी इस सीट को लेकर इतनी गंभीर भी नहीं थी। वह इसे एक तरह से सरप्लस मान रही थी।यहां पर छोटे बड़े चुनाव में पहले से ही कांग्रेस का दबदबा रहा है डाक्टर अभय यादव ने जनता के सामने विकास का विजन रखा जिसने अपना असर दिखाया। यहां के मतदाताओं को लगा की पहली बार कोई विकास की तैयारी के साथ हमारे बीच आया है। विधायक बनते ही अपने पहले कार्यकाल में नांगल चौधरी पर विकास के नाम पर कई सालों से जमीं काई को इस रिटायर आईएएस अधिकारी ने अपने प्रशासनिक अनुभव से हटाना शुरू कर दिया। पहले पानी के संकट से लडाई लडी। 143 करोड़ रुपए की लागत से दक्षिण हरियाणा की लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम को बेहतर बनाकर सभी टेलों तक पहुंचाने का काम किया। सबसे बड़ी परियोजना जो रेवाड़ी में बावल की जमीन पर साकार होने जा रही थी। वहां जमीन अधिग्रहण विरोध के चलते डाक्टर अभय इसे अपने क्षेत्र में ले आए। उन्होंने घाटासेर , बसीरपुर तथा तलोट गांव की करीब 1300 एकड़ जमीन पर लॉजिस्टिक हब की मंजूरी करा दी। इतना ही नहीं गांव कोरियावास में करीब 80 एकड़ के लगभग जमीन पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू करा दिया। यह विकास की वह रफ्तार थी जो शायद ही इतने कम समय में हरियाणा के किसी भी अपनी अलग चौधर रखते आए विधानसभा में भी नजर आई हो। नांगल चौधरी विधानसभा के एक गांव से दूसरे गांव तथा राजस्थान सीमा को जोडने वाले करीब 80 से अधिक नई सडकों का निर्माण करवाया। महेंद्रगढ से होकर गुजरने वाले तीन नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट को गति देने में भी यह विधायक चंडीगढ़ में जोरदार पैरवी करता नजर आया। देखते ही देखते नांगल चौधरी जहां कोई अधिकारी जाना पंसद नहीं करता था। गांव कस्बों की हालत देखकर बच्चो के रिश्ते तक नहीं होते थे। अब यही इलाका दक्षिण हरियाणा में विकास के नाम पर इतरा रहा है। राजनीति में महज विधायक रहते हुए डाक्टर अभय ने हरियाणा में भी अपनी अलग धाक जमा दी थी। जिसके चलते उनके मंत्री बनाने की आवाज शोर मचाने लगी तो केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के आशीर्वाद से मंत्री बनने वालों की नींद उड़ गईं। 2019 का विधानसभा चुनाव इस यादव नेता ने अपने विकास के दम पर जीता। आमतौर पर इस सीट पर यादव- गुर्जर जाति का समीकरण हार जीत बदलता रहा है। जब जब भी इस विधायक को मंत्री बनाने की चर्चा ने जोर पकड़ा उनके विरोधी खुलकर खिलाफत में खड़े हो गए। सरकार के मुखिया को भी नहीं चाहते हुए पीछने हटना पडा। डाक्टर अभय ने भी धैर्य नहीं खोया और वे मंत्री ना होते हुए भी उससे ज्यादा कार्य अपने क्षेत्र में करवाते जा रहे थे। यही वजह है की विधानसभा में रखे गए मजबूत पक्ष के कारण ही उन्हें 2020-21 का हरियाणा विधानसभा में सर्वश्रेठ विधायक का अवार्ड दिया गया ।इससे साफ जाहिर हो गया था की डाक्टर अभय किसी रहमों करम या दरबार में हाजिरी लगाने की संस्कृति के खिलाफ अपनी समझ और दूरदर्शी सोच से तेजी से आगे बढ़ चुके हैं। जिसका तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने पूरा साथ दिया। नतीजा आखिरकार नायब सिंह सैनी की सरकार में हाईकमान ने उन्हें मंत्रीमंडल में मंत्री बनाकर यह संदेश दे दिया की राजनीति का सही रास्ता अब नांगल चौधरी बता रहा है। अभय यादव की राजनीति को समझने के लिए ज्यादा गहराई या इधर उधर से जानकारी जुटाने की जरूरत नहीं है।