नगर निकाय चुनाव में मायाजाल की हकीकत से मुलाकात करिए : मेरे हिसाब से चले तो ईमानदार है नही तो बेईमान

—सोशल मीडिया के इस दौर में बाथरूम व बैडरूम को छोड़कर जो भी गतिविधियां सार्वजनिक प्लेटफार्म पर नजर आती है उसे माया अपने प्रभाव से  ब्रेकिंग, सनसनीखेज न्यूज बनाने की ताकत रखती है।


रणघोष खास. सुभाष चौधरी

Nagar Nikay Chunav 2026 Rewari : हरियाणा में रेवाड़ी, धारूहेड़ा नगर निकाय चुनाव को लेकर हर रोज तस्वीर अपना चेहरा बदल रही है। इसमें एक चेहरा जो अभी तक नही बदला है वह  है माया में ऊपर से नीचे तक पूरी तरह नहाया हुआ स्वंभयू व संकीर्ण दृष्टिकोण। जो तर्कसंगत सवाल जवाब के रास्ते से आने की बजाय अपनी मायावी हिसाब से अपना चरित्र बदलता रहता हैँ। मसलन चुनाव में अगर आप किसी उम्मीदवार के हिसाब से चलते हैं, बोलते है या फिर लिखते हैं तो आप उनकी नजर में ईमानदार, मूल्यवान बने रहेंगे। जैसे ही वास्तविकता से पर्दा हटना शुरू कर देते हैं देखते ही देखते यही प्रत्याशी अपनी मायावी रूप दिखाकर इसी ईमानदारी को एकाएक खलनायक की तरह बेईमान व अविश्सनीय बनाना शुरू कर देगा। चुनाव में लगभग सभी उम्मीदवारों का यही मायावी चरित्र रहता है। वे काफी हद तक गलत इसलिए नही है की इस माया की चपेट में आने के लिए हर कोई बेताब रहता है। इसकी मूल वजह चुनाव में माया का प्रचंड प्रभाव। जिसके सामने निष्पक्षता, हिम्मत कुछ समय के लिए उसी तरह सहमी रहती है जिस तरह सर्कस में शेर शिकारी के हाथों में नजर आने वाले हंटर को उस समय अपने ज्यादा ताकतवर मान लेता है।

इसमें कोई दो राय नही की चुनाव में माया का अपना असर रहता है। इसलिए सोशल मीडिया के इस दौर में बाथरूम व बैडरूम को छोड़कर जो भी गतिविधियां सार्वजनिक प्लेटफार्म पर नजर आती है उसे माया अपने प्रभाव से  ब्रेकिंग, सनसनीखेज न्यूज बनाने की ताकत रखती है। किस नेता व प्रत्याशी ने मंच पर आंखों में आंखे मिलाकर बात की, किस ने नजरें झुकाई, किस ने मुंह फेर लिया तो किसने आंखें दिखाई। इतना बेचारी आंखों को अपनी गतिविधियों का पता नही होता उससे कई गुणा कैमरे वाले उसके चरित्र पर इतना चौतरफा हमला कर डालते हैं की आखिरकार उसके पास अपनी आंखें बंद करने के अलावा कोई चारा नही होता। इस चुनाव में जिसे पत्रकार या मीडिया की उपाधि से नवाजा जाता है उसमें अधिकांश वास्तविक जीवन में कबाड़ी की दुकान पर पड़े उस कबाड़ की तरह होते हैं जो परिवार व समाज में जब किसी लायक नही होते तो सोशल मीडिया के इस रास्ते पर चलकर उस तरह चमक उठते हैं जिस तरह कोई डरावना चेहरा ब्यूटी पार्लर में आने के बाद विश्व सुंदरी की तरह नजर आता है। यह सब माया का मायाजाल होता है।  ऐसे परिवेश में जाहिर है की विचार, मूल्य, अभिव्यक्ति उस समय तक नजरें झुकाए रहती है जिस तरह द्रोपदी चीरहरण के समय भीष्म पितामाह, द्रोणाचार्य जैसे महान योद्धाओं की  दुर्योधन की हरकतों के चलते बनी हुई थी। इसलिए जब तक चुनाव संपन्न नही हो जाते दिमाग से यह भ्रम निकाल दीजिए की आप एक ही चरित्र में जी रहे हैं। माया का ऐसा प्रकोप है की वह आपके चरित्र को अपने हिसाब से ना जाने कितनी बार बदल बदल कर इस्तेमाल कर चुकी होती है की आपका मूल चरित्र ही अपनी पहचान के लिए माया के आगे गिड़गिड़ाता नजर आएगा। इससे बचने का एक ही रास्ता है जो आसान नही है। आप खुद पर भरोसा रखिए, गर्व करिए, अटल रहिए। यही माया की सबसे बड़ी कमजोरी है। वह यह देखकर तुरंत या तो अपना रास्ता बदल लेगी नही तो उसका भ्रमजाल एक समय बाद स्वत: खत्म हो जाएगा।