कोसली की राजनीति में यह चेहरा मायने रखता है

जगदीश यादव- कोसली इस बार एक दूसरे को देखकर मुस्करा रहे है..


 रणघोष खास. कोसली की कलम से

कोसली दक्षिण हरियाणा की ऐसी विधानसभा सीट है जिसके नतीजों का असर चुनावी उम्मीदवारों से ज्यादा प्रदेश ओर राष्ट्रीय स्तर की हैसियत रखने वाले नेताओं पर ज्यादा पड़ता है। इतना ही नही इसकी जमीन से निकलने वाली हार जीत भी कीटनाशक, खरपतवार नही होकर आर्गेनिक होती है। यहा के मतदाता खुलकर साथ देने या नही देने की वजह से जाने जाते हैं। इस लेख में हम चर्चा कर रहे हैं कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मंत्री जगदीश यादव की। यह राजनीति का वो चेहरा है जिसकी पहचान किसी पार्टी के नाम से नही अपने नाम से होती रही है। वे आजाद उम्मीदवार भी चुनाव में मजबूत पोजीशन पर रहते हैं।   हरियाणा में बंसीलाल और ओमप्रकाश चौटाला की सरकार में परिवहन एवं वन मंत्री रहे जगदीश यादव कोसली की राजनीति में समोसे में आलू की तरह है। इनके नाम के बिना कोसली की चर्चा ना आगे बढ़ पाती है ओर ना ही पीछे की तरफ सरकती है। इसकी वजह भी साफ है। वे अपने राजनीति में जीवन में इस इलाके के सबसे बड़े राजनीति परिवार रामपुरा हाउस यानि  पूर्व मुख्यमंत्री राव बीरेंद्र सिंह और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की चौधर से सीधे टकराते आ रहे हैं। जगदीश यादव ने राजनीति में सत्ता का मुकाम भी हासिल किया तो जबरदस्त संघर्ष से भी सामना किया। कई बार लगा की राजनीति का यह खिलाड़ी अब थक चुका है ओर इतिहास के पन्नो में दर्ज होने जा रहा है। रामपुरा हाउस ने मौका लगते ही जगदीश के राजनीति शरीर पर चौतरफा हमला करने में कोई कसर नही छोड़ी और काफी हद तक वे कामयाब भी रहे लेकिन हर चुनाव में यह राजनीति खिलाड़ी पूरी तैयारी के साथ खड़ा नजर आता है। इस बार चुनाव में जगदीश यादव ने कांग्रेस की टिकट लेकर रामपुरा हाउस को पहले राउंड में हरा दिया है। इस परिवार से राव यादुवेंद्र इस सीट पर प्रमुख दावेदार थे। कांग्रेस में हुडडा ने बेहद ही सोच समझकर 68 साल के  जगदीश यादव पर दांव चलाया है। लोकसभा चुनाव में कोसली ने लंबे समय बाद कांग्रेस से दीपेंद्र हुडडा को बढ़त दिलाकर सांसद बनाया है। इस लिहाज से यह सीट इस बार कांग्रेस की मजबूत दावेदारी पेश कर रही है।