राव की राजनीति में एक मंजे हुए खिलाड़ी का नाम सुनील मुसेपुर भी है
रणघोष खास. रेवाड़ी की कलम से
हरियाणा विधानसभा चुनाव में रेवाड़ी जिले की कोसली, रेवाड़ी ओर बावल विधानसभा सीट पर भाजपा हाईकमान ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की तरकश से तीर चला दिए हैं। निशाना सही लगा तो राव इंद्रजीत इस चुनावी महाभारत के महानायक बन जाएगे। चूक हुई तो उनकी आगे की राजनीति अपना रास्ता बदल लेगी।
राव ने इस बार अपने राजनीति दायरे को पूरी तरह से दांव पर लगा दिया है। ऐसा करने के पीछे उनकी अपनी ताकत है जो समर्थकों की फौज में हर समय खड़ी रहती है। रेवाड़ी में सभी सीटों पर राव समर्थकों को मैदान में उतारकर भाजपा रणनीतिकारों ने काफी हद तक खुद को हार जीत की जवाबदेही और जिम्मेदारी से मुक्त कर लिया है। सबकुछ राव के दिलों दिमाग पर छोड़ दिया गया है। ऐसे में राव के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनावी प्रबंधन है। इसमें एक विशेष नाम सुनील मुसेपुर का है जिसकी राजनीति चुनाव के समय टिकट दावेदारों में सबसे ज्यादा चर्चा बटोरती है। 2019 के विधानसभा चुनाव में भाग्य भाजपा की नाव में सवार होकर सेक्टर एक में स्थित सुनील के घर की तरफ चल पड़ा था। घर के बेहद नजदीक पहुंचा ही था की किसी ने पीछे से धक्का मारकर उसे मॉडल टाउन स्थित पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव के बेटे चिंरजीव के घर में प्रवेश करा दिया। महज 1317 वोटों से सुनील की राजनीति हारकर घर बैठ गई ओर कांग्रेस के चिंरजीव चंडीगढ़ पहुंच गए। महज इतने कम वोटों से हारना राजनीति हत्या से कम सदमा नही है। सुनील ने इसके बाद खुद को बिखरने की बजाय संवारना शुरू कर दिया। पांच साल जनता के बीच सामाजिक ओर धार्मिक आयोजनों में अपनी मौजूदगी से जगह बनाता चला गया। 2024 के चुनाव में भी उसका नाम चरम पर था लेकिन टिकट बजाय सेक्टर एक की तरफ चलने के सेक्टर चार स्थित कोसली विधायक लक्ष्मण यादव के घर में कुर्सी पर जाकर बैठ गईं। दो बड़े झटके के बाद भी मुसेपुर का निरंतर चलना जारी है। वे अब राव की पर्दे के पीछे चुनावी प्रबंधन के विशेष रणनीतिकार है। रेवाड़ी की तीनों सीटों पर क्या चुनौतिया आ रही है। कैसे प्रत्याशी का आमजन से सीधे जुड़ाव पैदा करके बेहतर माहौल बनाना है। यह सारी एक्सरसाइज सुनील मुसेपुर के दिमाग से होकर गुजर रही है। राव के प्रति सुनील का यह समर्पण बेशक राजनीति के सार्वजनिक प्लेटफार्म पर इस बार टिकट के रास्ते आगे नही बढ़ पाया लेकिन उससे कई ज्यादा राव ने विशेष जिम्मेदारी देकर यह संदेश दे दिया की सुनील चुनावी घोड़ा नही बन पाया लेकिन राजनीति दंगल में विकट परिस्थितियों में लड़ने वाला खिलाड़ी जरूर बनता जा रहा है। चुनाव में विशेष जिम्मेदारी का मिलना यह साबित भी कर रहा है।