नारनौल में बिखरी भाजपा से मजबूत हो रही कांग्रेस, त्रिकोणीय मुकाबले में नरेंद्र को मिली ताकत
रणघोष खास. नारनौल से ग्राउंड रिपोर्ट
दक्षिण हरियाणा में भाजपा के लिए सबसे सेफ सीट कहलाए जाने वाली नारनौल विधानसभा अब पार्टी में व्यापक स्तर पर चल रहे बिखराव के चलते कमजोर होती जा रही है। इसका सीधा फायदा कांग्रेस प्रत्याशी राव नरेंद्र सिंह को मिल रहा है। नरेंद्र सिंह इस सीट पर बेहद मजबूत उम्मीदवार है। वे हुडडा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहकर निजी तौर पर भी अपनी जमीनी हैसियत रखते हैं।
भाजपा में जबरदस्त बिखराव का अंदेशा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री नायब सैनी अपनी ही समाज की भारती सैनी को नारनौल सीट पर निर्दलीय नही लड़ने के लिए मनाने में नाकाम रहे। भारती सैनी भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष भी रह चुकी है। भाजपा के मौजूदा और चुनाव में प्रोजेक्ट सीएम का उनके कार्यालय में जाकर मनाना ओर नाकामी मिलना सीधे तोर पर साबित करता है की भाजपा जिस ओबीसी वोट बैंक के बूते पर सत्ता में वापसी देख रही है वह तो चुनाव में हर सीट पर बिखरता हुआ नजर आ रहा है। जब एक सैनी समाज से उम्मीदवार को अपने सीएम सैनी पर पर भी विश्वास नही है तो ओबीसी समाज के अन्य वर्ग में इसका क्या असर पड़ेगा। यह इस छोटे से घटनाक्रम से समझा जा सकता है। दरअसल भारती सैनी नारनौल में मजबूत चेहरा है। वह लगातार भाजपा से टिकट मांग रही थी लेकिन हाईकमान ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह पर लगातार तीसरी बार भरोसा जताते हुए उनके विश्वासपात्र ओमप्रकाश यादव को मैदान में उतार दिया। इस स्थिति में भाजपा का वोट बैंक जातिगत समीकरण पर बिखर गया तो कांग्रेस बेहद मजबूत पोजीशन में पहुंच जाएगी। इसकी वजह पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार कांग्रेस काफी बेहतर नजर आ रही है। ओमप्रकाश यादव के लगातार तीन बार विधायक रहने से उनकी खिलाफत का ग्राफ भी बढ़ा है। आमतौर पर भाजपा की दिल्ली- चंडीगढ़ से चलने वाली लहर से भाजपा उम्मीदवारों को सीधा फायदा हो जाता था इस बार वह हालात बिल्कुल नजर नही आ रहे। भारती सैनी के मैदान में रहने से मुकाबला पूरी तरह से त्रिकोणीय हो जाएगा जिसमें कांग्रेस साफ तौर से मजबूत नजर आ रही है।