ईरान युद्ध पर ट्रंप के बयान क्यों बदल रहे हैं? जानिए क्या है ‘मैडमैन थ्योरी’
मिडिल ईस्ट में छिड़े ईरान-अमेरिका संघर्ष को लगभग दस दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति को लेकर स्पष्टता नहीं बन पाई है। एक तरफ ट्रंप ईरान के खिलाफ भीषण सैन्य कार्रवाई और “20 गुना घातक” हमले की चेतावनी दे रहे हैं, तो दूसरी ओर वे शांति वार्ता और कूटनीतिक समाधान की संभावना भी जता रहे हैं।
इस विरोधाभासी रवैये ने अमेरिका समेत पूरी दुनिया में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ट्रंप की असली रणनीति क्या है।
ट्रंप के बयान से बढ़ा वैश्विक कन्फ्यूजन
विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ट्रंप प्रशासन के बयान और संदेश लगातार बदलते रहे हैं। कभी यह कहा गया कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब था, तो कभी दावा किया गया कि ईरान अमेरिका पर हमला करने वाला था।
कभी ट्रंप इसे इजरायल की सुरक्षा के लिए जरूरी कार्रवाई बताते हैं, तो कभी कहते हैं कि युद्ध जल्दी खत्म हो सकता है। इसी वजह से दुनिया भर में इस युद्ध की दिशा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
ईरान युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है।
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अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है
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कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है
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वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर खतरे की आशंका जताई जा रही है
इसके अलावा ईरान द्वारा खाड़ी देशों की ओर ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाओं ने पूरे मध्य-पूर्व में बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ा दिया है।
अमेरिका के अंदर बढ़ रहा राजनीतिक दबाव
इस युद्ध को लेकर अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। कई सर्वेक्षणों में संकेत मिला है कि अमेरिकी जनता का बड़ा हिस्सा किसी नए विदेशी युद्ध के पक्ष में नहीं था।
ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई के कारण सरकार पर दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में ट्रंप को घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय रणनीति के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
हाल ही में फ्लोरिडा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने दावा किया कि यदि अमेरिका ने हमला नहीं किया होता तो ईरान पूरे मध्य-पूर्व पर कब्जा कर सकता था, हालांकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।
क्या है ‘मैडमैन थ्योरी’
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बदलता हुआ रवैया दरअसल “मैडमैन थ्योरी” (Madman Theory) का हिस्सा हो सकता है।
इस रणनीति के तहत कोई नेता खुद को अनिश्चित और अप्रत्याशित दिखाता है ताकि विरोधी देश यह समझ ही न पाए कि अगला कदम क्या होगा।
इसका उद्देश्य यह होता है कि दुश्मन डर और अनिश्चितता के दबाव में समझौता करने या पीछे हटने पर मजबूर हो जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप शायद इसी रणनीति का इस्तेमाल कर ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
युद्ध के पीछे क्या हो सकते हैं कारण
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि युद्ध शुरू होने का एक कारण यह हो सकता है कि हाल के वर्षों में ईरान की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर हो गई थी।
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हमास और हिज्बुल्ला जैसे ईरान समर्थित संगठनों को सैन्य नुकसान हुआ
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अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था दबाव में रही
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क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आया
इन परिस्थितियों में अमेरिका और उसके सहयोगियों को लगा कि ईरान पर दबाव बनाने का यह सही समय हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल: क्या जल्दी खत्म होगा युद्ध
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह संघर्ष कितनी जल्दी समाप्त हो सकता है। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता और मिसाइल कार्यक्रम को नुकसान पहुंचने की खबरें जरूर आई हैं, लेकिन इसकी पूरी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष अब केवल सैन्य लड़ाई नहीं रह गया है। इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अमेरिकी घरेलू राजनीति—तीनों पर पड़ रहा है।
जब तक कोई स्पष्ट कूटनीतिक समाधान सामने नहीं आता, तब तक ईरान युद्ध का भविष्य अनिश्चित ही बना रहेगा।