बैलों की दौड़ ‘जल्लीकट्टू’ को मिली सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, माना राज्यों की सांस्कृतिक विरासत

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को तमिलनाडु सहित तीन राज्यों के उस कानून की वैधता को बरकरार रखा, जिसके तहत सांडों से जुड़े खेल जल्लीकट्टू, कंबाला और बैलगाड़ी दौड़ को मंजूरी दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में तीनों राज्यों (तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र) के संशोधित कानूनों को वैध ठहराते हुए ऐसे खेलों को राज्य की सांस्कृतिक विरासत माना है.

पांच न्यायाधीशों-न्यायमूर्ति के एम जोसेफ, न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया. ‘जल्लीकट्टू’ को ‘एरुथाझुवुथल’ के रूप में भी जाना जाता है. सांडों को वश में करने वाला यह खेल तमिलनाडु में पोंगल फसल उत्सव अवसर पर खेला जाता है.

उच्चतम न्यायालय ने सांडों को वश में करने वाले खेल ‘जल्लीकट्टू’, कंबाला और बैलगाड़ी दौड़ की अनुमति देने वाले तमिलनाडु, कर्नाटक तथा महाराष्ट्र के कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पिछले साल दिसंबर में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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