– कार्रवाई के डर से कंपनियां कर देती है सेवा पानी, दीपावली पर लाखों के गिफ्ट- नगदी ने अधिकारियों को सुर्खियों में रखा
रणघोष खास. धारूहेड़ा से ग्राउंड रिपोर्ट
आखिरकार समझ में नहीं आता कि सरकार ने हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को क्या सोचकर अमल में लाया हुआ है। इस बोर्ड की अभी तक की ऐसी कोई उपलब्धि या कार्यप्रणाली नहीं रही जिसके आधार पर यह दावा किया जा सके पर्यावरण को कंट्रोल करने में यह उदाहरण बनकर सामने आया हो। एक साल की रिपोर्ट से ही साफ जाहिर हो रहा है कि अधिकारियों ने कार्रवाई के नाम पर कंपनियों का भ्रमण करने के अलावा कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है। इस क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत महेंद्रगढ़ जिला भी आता है। धारूहेड़ा नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी बीती दीपावली व धनतेरस पर अच्छी खासी सुर्खियों में रहे जब उनके कार्यालय में कंपनियों की तरफ से गिफ्ट के साथ साथ नगदी लेते हुए अधिकारी एवं कर्मचारी नजर आए। इसकी रिपोर्ट सीआईडी एवं विजिलेंस के पास भी पहुंची। गिफ्ट लेना समझ में आता है लेकिन पैकेट में नगदी का सरेआम यह साबित करता है कि पर्यावरण भी पूरी तरह इस तरह के पैकेट में कैद हो चुका है। इसलिए धारूहेड़ा में बोर्ड का क्षेत्रीय मुख्यालय होने के बावजूद यह क्षेत्र प्रदूषण में हरियाणा स्तर पर सबसे शीर्ष पर पहुंच गया है।केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर ‘अति गंभीर’ और ‘गंभीर’ श्रेणी की सूची में हरियाणा के 17 शहर शामिल रहे। इनमें से जींद और मानेसर की हवा ‘अति गंभीर’ और 15 शहरों की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में रही। इसमें धारूहेड़ा विशेषतौर से शामिल है। जिसका एक्यूआई 300 से 400 के बीच रहा।
शिकायतों पर नहीं होता अमल, जवाब तक नहीं देते
गांव पांचोर निवासी दीपक ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग धारूहेड़ा के क्षेत्रीय अधिकारी को एक शिकायत 28 अक्टूबर 2021 को देते हुए प्रदूषण विभाग को अवगत कराया था की गांव सापली व पांचोर के बीच बनी एक कंपनी से निकलने वाले प्रदूषित धुँए की वजह से आसपास के खेतों में बोई गई सरसो की फसल खराब हो नष्ट होने लग रही है,इसको लेकर कई बार कंपनी के अधिकारियों से सम्पर्क किया गया लेकिन इसके बाद भी उनकी तरफ से लगातार प्रदूषण फैलाया जा रहा है। कंपनी से निकलने वाले धुँए की वजह से किसानों की सरसों की फसल भी नष्ट होने लगी है। शिकायत देने के 2 महीने बीतने के बाद भी प्रदूषण विभाग द्वारा कोई कार्यवाही तो दूर एक बार भी अधिकारियों द्वारा शिकायतकर्ता से सम्पर्क तक नही किया गया है। वही इसी कंपनी के द्वारा प्रदूषण फैलाये जाने की पिछले वर्ष भी सीएम विंडो पर एक शिकायत की गई थी जिसपर प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने कंपनी संचालक के साथ मिलकर आपसी समझौता कराते हुए कार्यवाही की बजाय शिकायतकर्ता की फसल के हुए नुकसान की भरपाई करा शिकायत को बंद करा दिया गया था।आसपास के लोगों ने बताया कि इस कंपनी की वजह से ग्रामीणों को चर्मरोगों के साथ गई अस्थमा,टीबी व अन्य गम्भीर बीमारियों का डर बना हुआ है।