नए संवत्सर के उत्सव को मनाया जाना सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण है

अखिल भारतीय साहित्य परिषद शाखा नारनौल के तत्वाधान में नव संवत्सर 2078 के उपलक्ष्य में नवसंवत् की पूर्व संध्या पर कोरोना महामारी के दृष्टिगत गूगल मीट पर एक ऑनलाइन विचार एवं काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष डॉ जितेंद्र भारद्वाज ने की। सर्वप्रथम सरस्वती वंदना के पश्चात नव संवत्सर विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते वरिष्ठ शिक्षाविद एवं विद्वान  पुरुषोत्तम दास आर्य ने  कहा कि  नव संवत्सर पूर्णतया वैज्ञानिक है तथा हमारे शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना  इसी दिन की गई। उन्होंने कहा कि नवसंवत भारतीय संस्कृति का परिचायक है। आदिकाल से ही भारतीय  इस पर्व को मनाते आ रहे हैं तथा हमें नई पीढ़ी को इसके महत्व  से परिचित करवाना चाहिए। परिषद के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष एवं  साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ पूर्णमल गौड़ ने सभी को बधाई दी उन्होंने कहा कि नए संवत्सर के उत्सव को मनाया जाना सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण है। कार्यक्रम संयोजक डॉ विक्रम सिंह ने  नवसंवत्सर को भारतीय संस्कृति  पहचान बताया  तथा  पाश्चात्य  संस्कृति की चकाचौंध में  अपनी संस्कृति को संजोकर रखने  की आवश्यकता बताई।  तत्पश्चात आयोजित कवि गोष्ठी में भारत भूषण तायल ने ‘प्रकृति करके सोलह श्रृंगार वर्ष में सजती है एक बार’ कविता सुनाकर शानदार शुरुआत की वही अटेली के  साहित्यकार महेंद्र कुमाार शर्मा ने शक्ति का प्रतीक  बेटी पर ‘सारी दुनिया घूर रही थी तूने मुझे बचाया मां’ कविता सुनाई वही क्षेत्र की प्रसिद्ध  लोक साहित्यकार डॉ कृष्णा आर्य ने ‘चैत्र प्रतिपदा नव संवत्सर खुशियां लेकर आया मृदुल मनोहर मास आया नव संवत्सर आज’ लोकगीत सुना कर काव्य गोष्ठी में समा बांध दिया। वहीं नांगल चौधरी के  कवि एवं गजल कार  प्रमोद वत्स ने ‘दूसरे वनवास से निज धाम आए हैं फिर अवध में राम आए हैं’  गीत गाकर  गोष्ठी को  राममय कर दिया। कार्यक्रम संचालन करते हुए परिषद महामंत्री डॉ पंकज गॉड ने  ‘लो आ गया वर्ष नया आज तुम्हारे द्वार’ कविता सुनाई वही वरिष्ठ कवि एवंं साहित्यकार जयप्रकाश कौशिक ने ‘तरु ने नव किसलय पाया, पलाश लाली में शर्माया कोकिल ने नव राग सुनाया नव संवत आया’ कविता सुनाई। शिव हरि यादव ने  ‘अभिनंदन है- अभिनंदन नव संवत्सर नए रूप  का अभिनंदन’  कविता के द्वारा  नए संवत का स्वागत किया तो वही अध्यक्षीय वक्तव्य के साथ  डॉ जितेंद्र भारद्वाज ने ‘आई बसंत की बेला, लगा लो स्वागत का मेला’ गीत सुनाया। इस अवसर पर  प्राध्यापक नरेश निंबाहेड़ा , नरोत्तम सोनी, सोनू भारद्वाज, रोशनलाल पूर्व सरपंच,  अरुण कुमार  आदि  गोष्ठी में उपस्थित रहे ।

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