मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा विक्रम संवत-2078 के सुअवसर पर एक विशिष्ट समारोह का आयोजन स्थानीय सेक्टर-1, पार्ट-2 स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त भवन में किया गया। बाबा खेतानाथ महिला विद्यापीठ, भीटेड़ा के प्राचार्य डॉ सुमेरसिंह यादव की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राज) के कुलपति डॉ उमाशंकर यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। डॉ जितेंद्र भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना-गीत के उपरांत डॉ पंकज गौड़ के कुशल संचालन में संपन्न हुए कार्यक्रम के प्रारंभ में चीफट्रस्टी डॉ रामनिवास ‘मानव’ ने विक्रम संवत को भारतीय संस्कृति का संवाहक बताते हुए कहा कि शक संवत को भारत का राष्ट्रीय संवत घोषित करना गलत था। अतः इस गलती को सुधारते हुए, शक संवत के स्थान पर विक्रम संवत को राष्ट्रीय संवत घोषित किया जाना चाहिए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि और अध्यक्ष के अतिरिक्त जिला युवा समन्वयक महेंद्रकुमार नायक और पूर्व जिला बाल-कल्याण अधिकारी विपिन शर्मा ने भी विक्रम संवत के महत्त्व और उपादेयता पर अपने विचार व्यक्त किए, वही अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के जिला अध्यक्ष डॉ जितेंद्र भारद्वाज, इंद्रप्रस्थ लिटरेरी फेस्टिवल की प्रदेश अध्यक्ष डाॅ कृष्णा आर्य और निगरानी समिति के अध्यक्ष महेंद्रसिंह गौड़ ने कविता-पाठ किया। समारोह में विपिन शर्मा को, उनकी सैंतीस वर्षों की विशिष्ट सेवा के दृष्टिगत, अंगवस्त्र, स्मृति-चिन्ह और सम्मान-पत्र भेंट कर सम्मानित भी किया गया। दो घंटों तक चले इस महत्त्वपूर्ण समारोह में ट्रस्टी डॉ कांता भारती, यूएन जिला युवा समन्वयक अनिल डोगरा, राजकीय महाविद्यालय, सीहमा के प्राचार्य सुनील कुमार, डीएवी स्कूल, नारनौल के प्राचार्य विरेंद्र कुमार, मेधावी छात्र अमन प्रभु आदि महानुभावों की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।