.. आपको कब चिंतित होना चाहिए
रणघोष खास. बीबीसी की खास रिपोर्ट से
लाल, पीला, गुलाबी और हरा. आपके पेशाब का रंग इंद्रधनुष जैसा भी हो सकता है. आपको जानकर हैरत होगी कि ये बैंगनी या जामुनी, नारंगी या फिर नीले रंग का भी हो सकता है.इतना ही नहीं, इसके अलावा किसी का पेशाब कुछ ऐसे रंगों का भी हो सकता है जो अमूमन नहीं होता है.पेशाब या यूरीन के माध्यम से हमारा शरीर वेस्ट प्रोडक्ट या दूसरे शब्दों में कहें तो गंदगी या कचरे को बाहर निकालता है.
इसमें शरीर में प्रोटीन, मांसपेशियों और लाल रक्त कोशिकाओं के अपघटन से बनने वाले नाइट्रोजनस कचरा भी शामिल है. इसके अलावा कई और चीज़ें भी हैं जो पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकलती हैं जैसे- विटामिंस और दवाएं जो हम खाते हैं.लेकिन ऐसी बहुत सारी चीज़ें हैं जो पेशाब में नहीं होनी चाहिए और जब हम डॉक्टर के पास जाते हैं तो एक अहम सवाल वो अक्सर पूछता है कि “आपके पेशाब का रंग कैसा है?”
इस सवाल का जवाब डॉक्टर को रोगी का मर्ज़ समझने और आगे के इलाज में मदद करता है.
लाल
अगर पेशाब का रंग लाल हो तो आम तौर पर इसका मतलब है कि इसमें ख़ून आ रहा है.ऐसा शरीर में पेशाब के तंत्र से जुड़े में किसी भी हिस्से में आई समस्या से हो सकता है.किडनी, ब्लैडर और प्रोस्टेट और पेशाब नलिकाओं से जुड़ने वाले किसी भी ट्यूब में अगर रक्त का स्राव हो रहा हो तो पेशाब का रंग लाल हो सकता है.पेशाब के रास्ते निकल रहा ख़ून कैसा दिखेगा, ये कई बातों पर निर्भर करता है. मसलन उसकी मात्रा क्या है, वो कितना ताज़ा है और पेशाब के लिए जाने पर ये अलग-अलग समय में अलग-अलग रंग का हो सकता है.अगर रक्त स्राव बड़ी मात्रा में हो रहा हो तो मुमकिन है कि पेशाब का रंग इतना गाढ़ा हो कि ये रेड वाइन जैसा लगे.इस ब्लीडिंग की कई वजहें हो सकती हैं- जैसे किडनी में स्टोन, कैंसर, ट्रॉमा, यूरिनरी ट्रैक्ट में कोई इन्फेक्शन.ज़रूरत से ज़्यादा चुकंदर खा लेने पर भी पेशाब का रंग लाल हो सकता है.
नारंगी और पीला
बेशक, हम ये जानते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में हमारा पेशाब पीले रंग के कई शेड्स में होता है और ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपने पानी कितने अच्छे से पीते हैं.
जैसे-जैसे पानी की कमी होगी, पेशाब का रंग गहरा पीला होता जाएगा और ये कभी कभी नारंगी रंग के क़रीब पहुंच जाएगा.अगर आप अच्छी मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन कर रहे हैं तो पेशाब का रंग पतला और फीके पीले रंग का होगा.पेशाब में जो चीज़ उसे पीले रंग का बनाती है, उसे यूरोबिलिन कहते हैं.इसके निर्माण की प्रक्रिया शरीर में मौजूद पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं के विघटन से शुरू होती है.ये वो रक्त कोशिकाएं होती हैं जो अब अपने सबसे अच्छे स्वरूप में नहीं रह गई हैं और उन्हें शरीर के सिस्टम से बाहर किया जाना ज़रूरी होता है.
इस प्रक्रिया में एक कम्पाउंड (यौगिक) बनता है जिसे बिलिरूबिन कहते हैं. ये कुछ हद तक पेशाब के रास्ते और कुछ हद तक आंतों के ज़रिए शरीर से बाहर निकल जाता है.हमारा लिवर (यकृत) इस बिलिरूबिन का इस्तेमाल बाइल (एक तरह का पित्त) निर्माण में करता है.ये बाइल शरीर में वसा के पाचन और उसके अपघटन के लिए महत्वपूर्ण है.बाइल आंत में रहता है और मल के ज़रिए बाहर निकल जाता है. इसी बाइल के कारण मल को उसका विशेष भूरा रंग मिलता है.जब बाइल आंत तक नहीं पहुंच पाता है, शायद इसकी वजह गॉलस्टोन (पित्त पथरी) या पित्त नलिका को रोकने वाला कैंसर हो सकता है, तो बिलिरूबिन वापस रक्त वाहिकाओं में पहुंच जाता है और वहां से वो पेशाब के रास्ते बाहर निकलने लगता है.
इससे इसका रंग गहरा होने लगता है- नारंगी या भूरे रंग का. अगर बिलिरूबिन की मात्रा बढ़ जाए तो त्वचा का रंग भी पीला पड़ने लगता है.शरीर की इस अवस्था को ‘ऑब्सट्रक्टिव जॉन्डिस’ यानी एक तरह का पीलिया कहते हैं. एंटीबॉयटिक रिफैंम्पिसिन समेत कुछ दवाओं की वजह से भी पेशाब का रंग नारंगी हो जाता है.