रणघोष अपडेट. हरियाणा
अपनी कार्यप्रणाली को लेकर अलग अलग कारणों से राज्य सरकार की छवि को धूमिल करती आ रही एचएसआईआईडीसी पंचकूला व बावल को आने वाले दिनों में अब कोर्ट के सामने कई सवालों के जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा। हालांकि वह पहले से ही पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहे केसों में कर भी रही है। अब सुप्रीम कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण को लेकर काफी हद तक स्थिति को स्पष्ट कर दिया है जिसमें एचएसआईआईडीसी को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा नजर आ रही है।
17 मई को टाइम्स ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट की खबर प्रकाशित की है जिसमें कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण को लेकर बनाए गए कानून के तहत स्थिति को काफी हद तक स्पष्ट किया है। कोर्ट का मानना है की इस कानून के तहत आप किसी की जमीन तब तक अपने नाम नही करा सकते जब तक तय की गई राशि को अदा नही किया हो। कोर्ट ने इस कानून के अंडर आर्टिकल 300ए के तहत सात प्रावधानों का भी उल्लेख किया है जिसके अंतर्गत जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा करना होता है। इस कानून का एचएसआईआईडीसी एमआरटीएस प्रोजेक्ट में कही भी पालन करती नजर नही आ रही है।
आइए सबसे पहले जाने क्यों घिर चुकी है एचएसआईआईडीसी
एमआरटीएस प्रोजेक्ट के तहत एचएसआईआईडीसी की तरफ से जमीन अधिग्रहित कर अवार्ड करने के बावजूद मुआवजा नहीं दिए जाने को लेकर रेवाड़ी जिले से 20 से ज्यादा गांवों के किसान लगातार सरकार से मुआवजा को लेकर संघर्ष करते आ रहे हैं। पीड़ितों ने लिखित में खुलासा किया हुआ है की कैसे उनकी जमीन को बिना पूरा मुआवजा दिए रिकार्ड में अपने नाम कब्जा दिखा दिया। इतना ही नही हरियाणा सरकार का राजस्व विभाग भी किसानों के पक्ष में मुआवजा को लेकर 35 से ज्यादा पत्र एचएसआईआईडीसी को भेज चुका है और उसकी कार्रवाई लगातार जारी है। कमाल की बात यह है की एक पत्र का जवाब भी नही दिया गया। जिला राजस्व विभाग रेवाड़ी की तरफ से भेजे गए पत्र के मुताबिक
मास रैपिड ट्रांजिस्ट सिस्टम परियोजना के लिए प्रथम चरण में 11 गांवों की कुल 196 एकड़ 3 कनाल 7 मरला भूमि का अवार्ड 12 जनवरी 2017 को घोषित किया गया था। जिसकी भूमि की मुआवजा राशि 236.23 करोड़ रुपए पहले ही वितरित किए जा चुके हैं। परंतु उपरोक्त 11 गांवों की भूमि में आने वाले स्ट्रक्चर की मूल्याकंन रिपोर्ट 6 साल से भी अधिक का समय व्यतीत हो जाने के बाद भी एचएसआईआईडी द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके अतिरिक्त इसी परियोजना के लिए दूसरे चरण में 9 गांवों की कुल 93 एकड़ एक कनाल 11 मरला जमीन का अवार्ड 7 अगस्त 2020 को घोषित किया गया था। जिसकी भूमि की कुल मुआवजा राशि 201 करोड़ 53 लाख 62 हजार 130 रुपए में से संबंधित विभाग द्वारा 120 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि उपलब्ध कराई गई थी। साथ ही इस जमीन पर पर बने स्ट्रक्चर का अवार्ड 10 सितंबर 2021 को घोषित किया गया था। जिसकी मुआवजा राशि 43 करोड़, 71 लाख् 85 हजार 892 रुपए भी जिला राजस्व विभाग रेवाड़ी को उपलब्ध नहीं कराए गए। जिसके लिए राजस्व विभाग लगातार 35 बार एचएसआईआईडीसी पंचकूला को पत्र लिख चुका है। कमाल की बात यह है कि एक भी पत्र का जवाब नहीं दिया गया। इस तरह कुल 125 करोड़ 25 लाख 48 हजार 22 रुपए की राशि एचएसआईआईडीसी ने अलग अलग समय अवधि में 5 साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जारी नहीं की। गौर करने वाली बात यह है की जिस जमीन को अधिग्रहित किया गया उसकी मुटैशन अपने नाम कराने में इस महकमें ने कोई ढिलाई तक नहीं दिखाईं। तेजी से बिगड़ रहे हालात को देखते हुए जिला प्रशासन की तरफ से जिला राजस्व अधिकारी बकाया मुआवजा राशि को लेकर 30 बार एचएचआईआईडीसी पंचकूला को पत्र लिख चुका है। जिसका एक बार भी जवाब नहीं आया। पत्र में अधिकारियों को लिखना पड़ रहा है की मुआवजा वितरण में अनावश्क देरी होने के कारण पूरे जिले में सरकार के प्रति पीड़ितजन एवं आमजन के मन में नकारात्मक छवि बनती जा रही है। इसलिए समय रहते बकाया मुआवजा राशि जारी की जाए ताकि किसी भी प्रकार की अनावश्यक बाधा उत्पन्न नहीं हो जाए।
फाइल सरकार के पास है हम क्या करें
एचएसआईआईडीसी के अधिकारी मौखिक तौर पर कहते रहे हैं की मुआवजा को लेकर फाइल सरकार के पास है। इसमें हम क्या कर सकते हैं। जो कुछ भी करना है सरकार को करना है। कमाल की बात यह है की एचएसआईआईडीसी इतनी ही पाक साफ है तो उसने अभी तक 35 से ज्यादा बार मुआवजा को लेकर पत्र लिख चुके जिला राजस्व विभाग रेवाड़ी को एक बार भी जवाब देना उचित क्यों नही समझा। इसका मतलब दाल में काला है। यहां बता दे की मुआवजा का लेकर किसान संगठन लगातार प्रदर्शन करते आ रहे हैं। यहां तक की एचएसआईआईडीसी कार्यालय पर ताला लगाने की नौबत तक आ चुकी थी।
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में जाने की तैयारी
पीड़ित अब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जमीन अधिग्रहण को लेकर स्पष्ट की गई टिप्पणी को लेकर काफी राहत में हैं। वे वकीलों से मिलकर नए सिरे से एचएसआईआईडीसी पर केस डालने की तैयारी में जुट गए हैं। इन पीड़ितों का कहना है की हमारे केस में एचएसआईआईडीसी की भूमिका भूमाफिया से भी ज्यादा खतरनाक रही है। हम इस महकमें के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे वे उठाएंगे।