धर्मबीर शांत रहे, दान सिंह आक्रमक, मतदाताओं ने शांति का दान दिया
रणघोष खास. भिवानी. महेंद्रगढ़
भिवानी महेंद्रगढ़ सीट जिस पर कांग्रेस के राहुल गांधी और भाजपा से पीएम नरेंद्र मोदी ने रैली कर इसे काफी चर्चित बना दिया था। यह सीट दिलचस्प मुकाबले में भाजपा उम्मीदवार चौधरी धर्मबीर सिंह के खाते में 40 हजार 689 वोटों के साथ जमा होती चली गईं। कांग्रेस उम्मीदवार राव दान सिंह पूरी तरह से मैदान में चुनौती देते नजर आए लेकिन वोटों के जातीय समीकरण ने हवा का रूख भाजपा की तरफ मोड दिया। यह जीत हजारों में हुई इसलिए भाजपा के लिए जितनी खुशी है उतना ही बड़ा सबक। जश्न वाली तो बात ही नही है। इस सीट पर भाजपा लगातार लाखों में जीतती आ रही है अचानक वह हजारों में आ जाए तो यह एक तरह से सबक है। आइए दोनों उम्मीदवारों की हार जीत की वजह को समझते हैं। चौधरी धर्मबीर सिंह जब मैदान में उतरे तो कई गांवों में किसान आंदोलन के नाम पर उनका जमकर विरोध हुआ। उन्होंने बेहद ही शांत भाव से उसे झेला। बर्दास्त किया। चेहरे पर आक्रोश के भाव तक नही आए। खरी खोटी भी खुब सुनी। मीडिया में इस तरह की खबरों को जमकर सुर्खिया मिली। ऐसा लगा की भाजपा इस सीट को हराने जा रही है। भिवानी जिले में किसान आंदोलन चरम पर रहा है। दूसरा कांग्रेस की तरफ से पूर्व मंत्री किरण चौधरी अपनी बेटी ऋुति चौधरी की टिकट को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त थी लेकिन टिकट काट दी गईं। यहा से कांग्रेस में बिगड़ा मामला अंतिम समय में चरम पर पहुंच गया और सीधे तौर पर धर्मबीर सिंह को फायदे में पहुंचा गया। कांग्रेस में राव दान सिंह को चुनाव में समय कम मिला लेकिन वे काफी हद तक अपने कुशल प्रबंधन से सफल नजर आ रहे थे। यहा उनकी प्रबंधन टीम में ऐसे लोग भी शामिल हो गए जिन्होंने समझदारी से ज्यादा मनमानी दिखाई जिसका नुकसान भी दान सिंह को उठाना पड़ा। दान सिंह की तरफ से उनके कुछ समर्थकों की नादानी के कारण यह जमकर दुष्प्रचार कर दिया गया की वोट के लिए पैसा पानी की तरह बहाया गया है। ऐसे बहुत से छोटे छोटे कारण भी दान सिंह की मजबूत दावेदारी को कमजोर करते चले गए। हार जीत बहुत कम अंतर से हुई है इसलिए भाजपा के लिए खुशी मनाने से ज्यादा सबक है। कांग्रेस के लिए प्लस वाली बात यह है की आने वाले विधानसभा चुनाव में उसने समय से पहले ही अपनी दावेदारी को मजबूत कर लिया है।