शिव नारायण जाट को पंजाबी, वीरेंद्र सिंह को सैनी, चौकन को अपना व्यवहार, सैनी को जेजेपी की ताकत जीताएगी
रणघोष खास . बावल की चौपाल से
बावल नगर पालिका चेयरमैन के सीधे चुनाव ने क्षेत्र के बड़े नेताओं के काम करने के तौर तरीकों के बायोडाटा को जांचने के लिए जनता के पास भेज दिया है। बेशक इस चुनाव में उम्मीदवारों को हार जीत का स्वाद चखना पड़ेगा लेकिन इसकी कीमत इलाके के चौधरी नेताओं को चुकानी पड़ेगी। यहां सबसे ज्यादा प्रतिष्ठा राज्य के कैबिनेट सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारीलाल की लगी हुई है। उसके बाद ऐसा कोई नेता नहीं जिसे सीधे तौर पर नुकसान होगा।
डॉ. बनवारीलाल ने अभी तक कांग्रेस की विचारधारा को लेकर घूम रहे शिव नारायण जाट को भाजपाई बनाकर पार्टी की टिकट पर मैदान में उतार दिया है। इससे भाजपा के एक धड़े में नाराजगी है लेकिन चुनाव में ऐसा होना आम बात है। शिवनारायण जाट की टिकट केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की मोहर पर ही फाइनल हुई है इसमें कोई शक नहीं है। जाट को जीताने की पूरी जिम्मेदारी डॉ. बनवारीलाल के कंधों पर है। जीत आसान बिल्कुल नहीं है। 10978 मतों वाली इस नगर पालिका 12 उम्मीदवार मैदान में खड़े हैं जिसमें चार जाट है। जाहिर है सभी के खड़े रहने से जाट का वोट बैंक पूरी तरह से बंट जाएगा। इस चुनाव में प्रमुख दावेदारों में जेजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दीनदयाल सैनी, आजाद उम्मीदवार वीरेंद्र सिंह एडवोकेट, पूर्व में चेयरमैन रह चुके चंद्रपाल चौकन के बीच चौतरफा मुकाबला है।
जिसके पास 2500 वोटों का जुगाड़ उसकी जीत तय
बावल नगर पालिका में कुल 10978 मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे। अगर वोटिंग 70 से 80 प्रतिशत होती है। उस हिसाब से 8500 के लगभग वोट डाले जाएंगे। ऐसे में चौतरफा टक्कर में जिस उम्मीदवार के पास 2500 के आस पास वोटों का मजबूत जुगाड़ है तो वह जीत के बेहद करीब माना जाएगा। वोटों का बिखराव पूरी तरह से तय है। जातिगत एवं आपसी रसूक के वोट बैंक ने मुकाबले को बेहद कांटे का बना दिया है।
शिवनारायण जाट की जीत पंजाबी वोट बैंक में छिपी हुई है
इस सीट पर पंजाबी समुदाय से किरण मेहंदीरत्ता चुनाव में अंत तक डटी रही तो भाजपा प्रत्याशी शिवनारायण जाट की जीत बहुत ही मुश्किल में बंट जाएगी। यहां 1100 से ज्यादा पंजाबी वोट है। ऐसे में पंजाबी वोट भाजपा से कट सकता है। अगर उम्मीदवार समर्थन में आ जाता है तो भाजपा मजबूत हो जाएगी। कुछ दिन पहले पंजाबी व्यापारी से मांगी गई फिरौती के चलते इस समुदाय ने गुर्जर समुदाय को लेकर थोड़ी दूरियां बना रखी है। चंद्रपाल चौकन इसी समुदाय से संबंध रखते हैं। इसलिए पंजाबी उम्मीदवाद के मैदान में खड़े होने की स्थिति में चौकन अपने व्यवहार एवं काम करने के तौर तरीकों के चलते काफी मजबूत स्थिति में दिख रहे है। इसी तरह जेजेपी समर्थित आजाद उम्मीदवार दीनदयाल सैनी की दावेदारी पूर्व मंत्री एवं कांग्रेसी नेता डॉ. एमएल रंगा समर्थित आजाद उम्मीदवार वीरेंद सिंह एडवोकेट को परेशानी में डाल रही है। अगर सैनी मैदान से हट जाते हैं तो वीरेंद्र सिंह बाजी पलट सकते हैं जो आसान नजर नहीं आ रहा है। वीरेंद्र सिंह को डॉ. एमएल रंगा के मजबूत वोट बैंक का काफी फायदा मिलेगा। सैनी जेजेपी का समर्थन मिलने से मजबूत स्थिति में आ गए हैं।
खामोशी से चुनाव लड़ रहे ये उम्मीदवार बदल सकते हैं समीकरण
इस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने सहीराम पर अपना भरोसा जताया है। इसी तरह किसानों की राजनीति करते आ रहे रामकिशन महलावत भी समीकरण बदलने का गणित तैयार करके बैठे हैं। अन्य उम्मीदवार भी प्रमुख दावेदारों की उम्मीदों पर थोड़े अंतराल के वोटों से पानी फेर सकते हैं।
पैसों का चलेगा जमकर खेल, सभी तमाशीन बनकर नजारा देखेंगे
इस चुनाव में पीछे के दरवाजे से कुछ उम्मीदवार पानी की तरह पैसा बहाने की तैयारी में जुट गए हैं। कुछ दावेदारों ने इसके लिए वोटों के रेट भी तय कर लिए हैं। मीडिया चुनाव तक आंख मूंदे रहे इसके लिए उनके पैकेज सिस्टम फाइनल कर दिए हैं। यानि सबकुछ मैनेज करने का खेल भी बड़ी चालाकी से खेला जा रहा है। कुछ उम्मीदवार चुनाव के अंत में एक दूसरे के समर्थन में आते हैं तो समझ जाइए वे भी इस माया के खेल में खिलाड़ी साबित हो जाएंगे।
मैदान में 12 प्रधानी, 37 उम्मीवार पार्षद के लिए मैदान में
मंगलवार को नाम वापसी का दिन था। पार्षद पद के लिए वार्ड एक से मनीषा, दो से अमित कुमार, 8 से कृष्ण कुमार, 11 से वेदप्रकाश, बलदेव, कृष्णलाल शामिल है। वार्ड 6 से देवेंद्र कुमार निर्विरोध पार्षद चुने गए हैं।