– कायदे से दलालों को लाइसेंस दे देना चाहिए
-कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों के कमीशन को मान्यता मिलनी चाहिए
– भ्रष्टाचार को सम्मान की दृष्टि से देखे, यह गजब की योग्यता है
– रोजमर्रा में हत्या- दुष्कर्म को छोड़कर होने वाले अपराधों मसलन चोरी, डकैती, हेरा फेरी, भ्रष्टाचार जैसे केसों में तुरंत जुर्माना लगाकर खत्म कर देना चाहिए। कम से कम कोर्ट- कचहरी का अनावश्यक खर्च भी बच जाएगा ओर सरकार की आमदनी में गजब की बढ़ोतरी होगी। जेले ऐसा करने वालों के लिए ट्रेंनिंग सेंटर में बन जाएगी।
रणघोष खास. सुभाष चौधरी
– इसे सरकार के सिस्टम में बनी नीतियों का कमाल कहेंगे या ऐसी हकीकत जो सरेआम यह साबित करती है कि सिस्टम से चलोंगे तो चलने नहीं देंगे, छल- मक्कारी-बेईमानी- धोखेबाजी से चलकर देखिए यही सिस्टम साया बनकर ऐसा इरादा रखने वालों के साथ नजर आएगा। रेवाड़ी डीटीपी ने 10 ऐसी अवैध कालोनियों की सूची तैयार की जिसे नियमित किया जाएगा। सालों से हर जगह यह परपंरा चलती आ रही है। नई बात नहीं है। पहले इन्हीं कालोनियों पर इसी डीटीपी ने जेसीबी चलाई थी कि यह अवैध है। अब यही डीटीपी इसे वैध करने में जुट गई है। इसी तरह बिजली का बिल मत भरिए। कुछ दिन बाद स्कीम आएगी जिसमें सरचार्ज माफ होगा ओर बिजली निगम के अधिकारी सादर अनुरोध के साथ डिफालटर उपभोक्ताओं को बिल भरने की गुहार करते नजर आएंगे। जो उपभोक्ता ईमानदारी से बिल भर रहा है। किसी कारणवश समय पर बिल नहीं भर पाया तो किसी सूरत में उसका सरचार्ज माफ नहीं होगा। सरकारी बैंकों में जाइए लोन लिजिए ओर भूल जाइए। चुनाव नजदीक आएगा किसी ना किसी राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र में लोन माफी की घोषणा होगी। अब समझ में यह नहीं आ रहा है कि वैध- अवैध में अंतर क्या बचा है। एक तरफ बताया जा रहा है कि जो कार्य नियमों के खिलाफ जाकर किया जाए वह अवैध है यानि किसी लिहाज से उसे मान्यता नहीं दी सकती। अगर यह सही है तो कुछ समय बाद यह अवैध वैध कैसे हो गया। इसका मतलब कायदे से रोजमर्रा में हत्या- दुष्कर्म को छोड़कर होने वाले अपराधों मसलन चोरी, डकैती, हेरा फेरी, भ्रष्टाचार जैसे केसों में तुरंत जुर्माना लगाकर या कोई शुल्क लेकर खत्म कर देना चाहिए। कम से कम कोर्ट- कचहरी का अनावश्यक खर्च भी बच जाएगा ओर सरकार की आमदनी भी गजब की बढ़ोतरी होगी। जेले ऐसा करने वालों के लिए ट्रेंनिंग सेंटर का काम करेगी।
दो दिन पहले करनाल में एक बेहद ही जरूरतमंद परिवार से 18 साल के युवक को इसलिए जान देनी पड़ी कि बाइक के कागजात पूरा नहीं होने पर पुलिस ने 11 हजार से ज्यादा का चालान कर दिया जो उसकी हैसियत से बाहर था। उधर किसी भी सरकारी दफ्तर मे जाइए। लाइन में लगिए काम नहीं होगा। दलाल से संपर्क करिए यही काम पल झपकते ही हो जाएगा। यह सब आजकल में नहीं हो रहा। देश की आजादी के बाद से खुली आंखों के सामने होता आ रहा है ओर आगे भी होता रहेगा। कुछ नहीं होने वाला जब सरकार की नीतियों में डिफाल्टरों के लिए छूट हो ईमानदारी पर चलने वालों के लिए जुर्माना है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी से लेकर शीर्ष अधिकारी एवं सरकार चलाने वाले नेता कुर्सी पर बैठने से पहले इस सिस्टम की एबीसीडी से लेकर जेड तक ट्रेनिंग ले चुके होते हें।
कायदे से दलालों को लाइसेंस दे देना चाहिए
हर छोटे- बड़े काम दलालों के हाथों से आसानी से हो जाते हैं। कैसे हो जाते हैं यह बताने की जरूरत नहीं है। कायदे से जिस तरह डिफाल्टरों के लिए छूट का प्रावधान है। उसी तरह दलालों को भी सरकार लाइसेंस जारी कर दें। सरकारी दफ्तरों में समय पर काम कराना भी किसी आईएएस, डॉक्टर्स, विधायक एवं मंत्री से कम योग्यता से कम नहीं है। यह भी गजब की प्रतिभा है जो हजारों- लाखों में कुछ के पास होती है। इसलिए समय आ गया है कि सरकार चोरी छिपे पीछे के दरवाजें से काम करने वाले दलालों के लिए लाइसेंस जारी कर दें। इससे सरकार की विजिलेंस टीम को राहत मिलेगी साथ ही दफ्तरों के आगे बेवजह की भीड़ नजर नही आएगी। दलाल भी इज्जत के साथ काम करते नजर आएंगे।
कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों के कमीशन को मान्यता मिलनी चाहिए
सरकार की किसी भी योजना को जमीन पर उतरने से पहले चोरी छिपे कमीशनखोरी का टीका लगवाना पड़ता है। जब देश के प्रधानमंत्री यह स्वीकार कर चुके हैं कि विकास कार्यों में बजट की राशि का 75 प्रतिशत से ज्यादा कमीशनखोरी में चला जाता है तो फिर क्या रह गया। यह किसी सूरत में बंद होने वाला नहीं है। सभी अच्छी तरह से जानते हें। इसलिए कमीशन की स्लैब प्रणाली लागू कर देनी चाहिए कि किस कर्मचारी व अधिकारी को कितना प्रतिशत कमीशन मिलेगा। इससे सरकार को बेहताशा फायदा होगा। नंबर दो की राशि एक नंबर में आएगी। उस पर कमीशन लेने वालों को टैक्स भरने में भी परेशानी नहीं होगी। तरह तरह के अपराध भी कम हो जाएंगे।
भ्रष्टाचार को सम्मान की दृष्टि से देखे, यह गजब की योग्यता है
पैसो का लेन देन ही भ्रष्टाचार नहीं होता। दिन भर तरह तरह की झूठ बोलकर काम करवाना भी इसी श्रेणी में आता है। ऐसा करने वालों में गजब की ऊर्जा होती है। कड़ी मेहनत करनी होती है। यहां तक की कई बार जलालत भी झेलनी पड़ती है फिर भी मुस्कराते रहते हैं। सभी जानते हैं कि अगर आप संबंधित विभाग, दिल्ली या चंडीगढ़ मुख्यालय अपनी फाइल या केस को लेकर जा रहे हैं। अगर जान पहचान नहीं है तो यह आपकी मूर्खता है। कोई आपसे बात करना पसंद नहीं करेगा। सिस्टम से जाइए ऐसे मिलेंगे मानो कर्तव्य की भावना कूट कूट से भरी हो। सबको सब पता है। हम इसलिए लिख रहे हैं कि बहुत हो चुका पांखड- मक्कारी- छल- कपट को पालते हुए। अब वह समझदार हो चुके है। वे चिल्ला रहे हैं उन्हें खुलकर जिम्मेदारी दीजिए ताकि आन बान शान के साथ काम कर सके। सबसे बड़ी बात बेईमानी- ईमानदारी का अंतर भी खत्म हो जाएगा जिसकी वजह से बेवजह का तनाव बना रहता है।