जिस वाइस चेयरमैन के पास बैठने की कुर्सी नहीं, उसे हटाने की कोशिश, कुछ नहीं होना
रणघोष खास. सुभाष चौधरी
पिछले कुछ दिनों से नगर परिषद रेवाड़ी में वाइस चेयरमैन श्याम चुघ को हटाने के लिए पार्षदों का एक धड़ा लामबंद नजर आ रहा है। जिसकी संख्या आए दिन कम ज्यादा हो रही है। शहर के नारनौल रोड स्थित एक होटल में चुघ को हटाने के लिए जितने पार्षद एकत्र हुए वे अगले दिन पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस की मीटिंग में आधे से भी कम रह गए। चुघ हटेंगे या बने रहेंगे यह केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की समझ से तय होगा। अभी तक जो रिपोर्ट आ रही है उसके मुताबिक श्याम चुघ का कुछ बिगड़ने वाला नहीं है। राव इस छोटे स्तर की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। सबसे बड़ी बात कुछ दिन पहले जिस तरह नप की निगरानी समित के दो सदस्यों विवेक ढींगरा व सुनील ग्रोवर को पार्षदों के दबाव में हटाया गया। उसके बाद श्याम चुघ को जिस तरह से निशाने पर लिया जा रहा है। उस हिसाब से जातिगत राजनीति के हिसाब से पंजाबी समाज में गलत मैसेज जाएगा। तीनों ही सदस्य इसी समाज से संबंध रखते हैं।
नगर परिषद में वाइस चेयरमैन के अधिकार, प्रभाव का जहां तक सवाल है। वर्तमान में नगर परिषद में वाइस चेयरमैन को बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं मिली है। दूसरा उनकी हैसियत सामान्यत नगर पार्षद से ज्यादा कुछ नहीं है। जरूरी कागजात में उनके हस्ताक्षर का भी कोई महत्व नहीं है। इतना जरूरी है कि नप चेयरपर्सन के अचानक छुटटी पर चले जाने या अन्य कारणों से उपस्थित नहीं रहने की स्थिति में वाइस चेयरमैन उनके स्थान पर नप का संचालन करने का अधिकारी होगा। अब सवाल आता है कि इतना सबकुछ स्पष्ट होने के बावजूद पार्षदों का एक धड़ा श्याम चुघ को हटाने में क्यों पीछे पड़ा हुआ है। इसके पीछे कई तरह की रणनीति काम कर रही है। पहली श्याम चुघ को हटाने के लिए कम से कम 22 पार्षदों की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव लाना जरूरी है। अगर पार्षद इस मकसद में कामयाब हो गए तो इसका मनोवैज्ञानिक दबाव नप चेयरपर्सन पर रहेगा। चेयरपर्सन को हटाने के लिए 24 पार्षदों का एकजुट होना जरूरी है। नप में कुल 34 नगर पार्षद है जिसमें 3 सरकार द्वारा मनोनीत है जिसे वोट डालने का अधिकार नहीं है।
बेवजह की परेशानी को बढ़ने नहीं देंगे राव
नगर परिषद चेयरपर्सन पूनम यादव व वाइस चेयरमैन श्याम चुघ केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के आशीर्वाद से इस पद पर बने हुए हैं। ऐसी कोई बड़ी वजह नहीं है जिसकी वजह से राव को वाइस चेयरमैन हटाने के लिए मजबूर होना पड़े। अगर वे ऐसा करते हैं पंजाबी समाज में इसका बड़ा गलत नकारात्मक मैसेज जाएगा। इससे पहले निगरानी समिति से हटाए गए विवेक ढींगरा भी राव की वजह से सदस्य बने थे। हटाए गए अन्य दूसरे सदस्य सुनील ग्रोवर भाजपा के पूर्व दिवंगत ओमप्रकाश ग्रोवर के पुत्र है। ऐसी स्थिति में राव कोई बड़ी वजह नहीं होने की स्थिति में किसी सूरत में जाति राजनीति के चलते बेवजह की परेशानी को नहीं बढ़ने देंगे।
कहीं नप चेयरपर्सन को हटाने का होमवर्क तो नहीं हो रहा
वाइस चेयरमैन की नप में कोई प्रभावशाली भूमिका नहीं होने के बावजूद उसे हटाने के लिए पार्षदों का जगह जगह मीटिंग करने के पीछे एक दूसरा एजेंडा भी सामने आ रहा है। कुछ पार्षदों की माने तो वाइस चेयरमैन तो बहाना है असली निशाना चेयरपर्सन है। पिछले नप चुनाव में सीधी वोटिंग से जनता ने चेयरपर्सन का चुनाव किया था। इसलिए उसे हटाने के लिए कम से कम 24 पार्षदों का एकजुट होना जरूरी है। पिछले कुछ दिनों से नप चेयरपर्सन के पति बलजीत यादव की मीटिंग में कुछ पार्षदों से काफी नोंक झोंक हुई थी। अभी तक वहीं स्थिति बनी हुई है। जब तक राव का चेयरपर्सन पर आशीर्वाद बना हुआ है उसे हटाना आसान नहीं है। दूसरा 24 पार्षदों का एकजुट करना भी इतना आसान नहीं है। ऐसे में कमजोर व प्रभावहीन वाइस चेयरमैन को हटाने के लिए पार्षदों का यह प्रयास एक तरह से चेयरपर्सन को हटाने की तैयारी से पहले का होमवर्क भी नजर आ रहा है।