और तुम रोज़ मेरी कीमत दुगनी करोगे

“रुतबा है, बड़ी गाड़ी है, आलीशान फ्लैट के मालिक हो, और एक अच्छा परिवार है; और क्या चाहिए खुशी पाने के लिए?” वह हँसा, और मुझ पर एक उड़ती सी नज़र डाली।
वह मेरे भीतर तक देख रहा है, मुझे विचलित करने के लिए यह काफ़ी था।
फिर शुरू हो गया, “फिर भी चेहरे पर खुशी नहीं। जो खुशी मेरे चेहरे पर है वह पाने के लिए सब कुछ खोना पड़ सकता है।” उसकी आवाज़ थोड़ी भारी हो गयी थी। पर चेहरे की मुस्कान ज्यों की त्यों खिली थी।
“ये पैर कटने से पहले मैंने चार खून किये हैं। लाओ, जो भी निकालना है, निकालो…पाँच या पचास, अगर आगे जानना चाहते हो।”
वह चुप हो गया। मैं खड़ा रहा कि आगे कुछ कहे।
आख़िर मैंने बटुआ निकाला और 50का नोट उसके खुले प्रस्ताव से हाथ पर रख दिया।
“बड़ा दाव खेल गये हो। मैं रोज़ तुम्हें अपने बारे में बस एक बात बताऊँगा, और तुम रोज़ मेरी कीमत दुगनी करोगे। आज बस इतना ही, चाहो तो कल आ जाना….मगर सौ रुपये।”
क्रमश……